शिमला। केंद्र सरकार द्वारा यूरोपीयन संघ ईयू के साथ घोषित एफटीए (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) प्रदेश के सेब बागवानों के लिए बर्बादी का कारण बनेगा। यह बात किसान नेता एवं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कौशल मूंगटा ने कही। उन्होंने कहा कि इस समझौते से सेब सहित कई फलों और फलों से बने उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी कटौती का प्रावधान किया है। इसका सीधा असर हिमाचल की लगभग 5,500 करोड़ रुपये की सेब आधारित आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। सेब पर आयात शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करना और जूस पर 0 फीसदी ड्यूटी करना सीधे-सीधे हिमाचल की 6,000 करोड़ की सेब आर्थिकी को तबाह करने की साजिश है। यह समझौता लागू हुआ तो 3 लाख से ज्यादा बागवान परिवार सड़क पर आ जाएंगे। संवाद