कोटखाई के पुजाली गांव की 90 वर्षीय ग्यारी देवी।
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हिमाचल में सेब पैकिंग में पिछले कुछ दशकों से कई बदलाव हुए हैं। लकड़ी की पेटियों में अखबार लपेटकर भेजे जाने वाले सेब से लेकर आज ग्रेडिंग मशीनों से हो रही पैकिंग तक के इस सफर की गवाह हैं कोटखाई के पुजाली गांव की 90 वर्षीय ग्यारी देवी। सेब सीजन शुरू होते ही ग्यारी देवी आज भी ग्रेडिंग मशीन पर सेब की पैकिंग में हाथ बंटाती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह देखने लायक है। वह बताती हैं कि जब 1990 के दशक में सेब को एक-एक कर अखबार में लपेटा जाता था और लकड़ी की पेटियों में पैक किया जाता था, तब भी वह सीजन के दौरान इस काम में सहयोग करती थीं। समय बदला तो सेब पैकिंग का तरीका भी बदल गया। वर्ष 1995-96 के बाद लकड़ी की पेटियों की जगह कार्टन बॉक्स का चलन बढ़ा। इसके बाद ग्रेडिंग मशीनों और आधुनिक तकनीक ने पैकिंग को और आसान बना दिया। ग्यारी देवी ने इन सभी बदलावों को अपनी आंखों के सामने होते देखा है।