उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री।
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हिमाचल प्रदेश सरकार चालू वित्त वर्ष 2022-23 में राज्य के जीडीपी का छह फीसदी तक का कर्ज ले सकेगी। इसके लिए सदन में शुक्रवार को राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध (एफआरबीएम) संशोधन विधेयक 2023 ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। जीएसटी रिटर्न भरने के सरलीकरण से संबंधित एक अन्य विधेयक को भी पास कर दिया गया। दोनों विधेयकों के पारण के ये प्रस्ताव उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने रखे।
राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध (एफआरबीएम) संशोधन विधेयक 2023 को पारित करने के बाद वर्ष 2022-23 में राज्य के जीडीपी का 6 फीसदी कर्ज लिया जा सकेगा। 2023-24, 2024-25 में यह सीमा 3.5 प्रतिशत होगी, जबकि इसे सामान्य परिस्थिति में केवल जीडीपी का 3 फीसदी तक ही लिया जा सकता है। सदन में एक अन्य जीएसटी संशोधन विधेयक भी पारित किया गया। इसमें केंद्रीय अधिनियम के संशोधन शामिल किए गए हैं।
प्रदेश पर 74,622 करोड़ का कर्ज : अग्निहोत्री
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में हिमाचल प्रदेश पर कर्ज करीब 74,622 करोड़ रुपये कर्ज हो जाएगा। भाजपा की पिछली सरकार ने 26,716 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है।