शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में फोरेंसिक साइंस और पर्यावरणीय सततता पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मंगलवार को समापन हो गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि लोकायुक्त न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सीबी बारोवालिया रहे। उन्होंने कहा कि सीखना जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है और फोरेंसिक साइंस न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि डीएनए प्रोफाइलिंग, हस्तलेख विश्लेषण और रक्त परीक्षण जैसे वैज्ञानिक तरीकों ने न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाई है। सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने फोरेंसिक तकनीक, पर्यावरणीय चुनौतियों और सतत विकास के दृष्टिकोण पर विचार साझा किए। प्रो. राजेंद्र वर्मा, प्रो. वाइस-चांसलर, प्रो. ममता मोक्टा ने सम्मेलन में विचार व्यक्त किए। संवाद