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नशेे की ओवरडोज से मौत तय : डॉ. दीपा

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शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शोध समिति ने अन अटेंप्ट टू प्रीवेंट ड्रग एडिक्शन एंड मेंटल हेल्थ इशूज नशा मुक्ति पर कार्यशाला का आयोजन किया। समिति की संयोजिका चित्रेश ने इस संगोष्ठी में मौजूद शिक्षकों, छात्रों और मुख्य वक्ता डॉ. दीपा का स्वागत किया। डाॅ. दीपा ने युवाओं में मनोवैज्ञानिक रोगों और नशे के बढ़ते मामलों के बारे में जानकारी दी। कहा कि बचपन से ही बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत करवाया जाना चाहिए। कहा कि सिंथेटिक ड्रग्स इतनी हानिकारक हो सकती है कि ओवरडोज से 24 घंटे में मृत्यु हो जाती हैै। इस समय 15 से 35 वर्ष के युवा नशे की चपेट में आ रहे है। संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि प्रो. ज्योति प्रकाश ने बताया कि किस तरह से आध्यात्मिक गतिविधियों से सामाजिक कुरीतियों को खत्म किया जा सकता है। कार्यक्रम में महेंद्र धर्माणी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि नशा करने वाले और उसके परिवार को दोषी न समझते हुए पीड़ित समझा जाए। धर्माणी ने कहा कि चिट्टे जैसे नशे से निजात तभी पाया जा सकता है जब नशेड़ी के परिवारों को सजा न देकर उन्हें इस दलदल से बाहर निकाला जाएगा। कार्यक्रम में समिति के संयोजक नेकराम, एबीवीपी के अध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा, प्रांत संगठन मंत्री धनदेव ठाकुर, डॉ. नितिन व्यास, डॉ. शशिकांत शर्मा और शोध प्रांत संयोजक सर्वेश दीक्षित मौजूद रहे। ब्यूरो
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