शिमला। राम बाजार के राम मंदिर में रविवार को अमृतवाणी सत्संग एवं प्रवचन का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रवक्ता अश्वनी बेदी ने श्रद्धालुओं को निस्वार्थ सेवा के आध्यात्मिक महत्व को समझाया। बताया कि सेवा ईश्वर प्राप्ति का सरल और पवित्र माध्यम है। किसी पीड़ित, असहाय व्यक्ति अथवा जीव-जंतु की निस्वार्थ सेवा करना साक्षात ईश्वर की आराधना के समान है। सेवा मनुष्य के भीतर की नकारात्मकता और अहंकार को दूर कर आत्म शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। जहां पवित्र सेवा का भाव होता है, वहां स्वयं हरि का वास होता है। स्वामी सत्यानंद महाराज की प्रसिद्ध रचना भक्ति प्रकाश की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा में हरि आप हैं, सेवा हरती पाप। नीचे झुक सेवा करो, हरो दीन संताप। उन्होंने बताया कि यह वाणी मानव जीवन में सेवा भाव के महत्व और उसके कल्याणकारी प्रभाव को स्पष्ट करती है। दोपहर को श्रद्धालुओं को भंडारा परोसा गया।