शिमला। गंज बाजार में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन परीक्षित के जन्म की कथा सुनाई गई। कथावाचक पंडित सुरेश भारद्वाज ने बताया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने मृत बालक परीक्षित को जीवनदान दिया। अश्वत्थामा की ओर से पांचों पुत्रों की हत्या करने का समाचार मिलने पर द्रौपदी ने आमरण अनशन किया। अश्वत्थामा के मस्तक की मणि प्राप्त होने तक अनशन तोड़ने से इन्कार कर दिया। अर्जुन अश्वत्थामा को पकड़ने के लिए निकले और दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। अश्वत्थामा ने पांडवों को नष्ट करने के लिए अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा पर ब्रह्मास्त्र का वार किया। भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा को परीक्षित नामक बालक के जन्म का वरदान दिया था। ब्रह्मास्त्र के तेज से गर्भ में बालक जलने लगा। तब कृष्ण ने सूक्ष्म रूप से उत्तरा के गर्भ में प्रवेश किया। उन्होंने अपनी जलती हुई गदा से ब्रह्मास्त्र की अग्नि को शांत किया। कथा समाप्त होने के बाद विशेष आरती और प्रसाद वितरण किया गया। सनातन धर्म सभा के प्रचार मंत्री सुमन पाल दत्ता ने बताया कि 5 जून तक कथा प्रतिदिन शाम 3:30 से 6 बजे तक आयोजित की जाएगी।