पूर्व मंत्री महेंद्र नाथ सोफत को विधायक डॉ. राजीव बिंदल की ओर से दर्ज किए गए आपराधिक मानहानि मामले में ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की सरकार में परिवहन मंत्री और हिलोपा के पूर्व उपाध्यक्ष महेंद्र नाथ सोफत को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सोलन द्वारा आपराधिक मानहानि मामले में जारी तलबी आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
महेंद्र नाथ सोफत के खिलाफ पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव बिंदल ने आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज करवा रखा है। मामले में न्यायिक दंडाधिकारी सोलन ने 2 जून, 2012 को सोफत के खिलाफ समन जारी किए थे। इन आदेशों को सोफत ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोलन के समक्ष चुनौती दी थी। इसे आंशिक तौर पर स्वीकारते हुए यह स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
इन आदेशों को प्रार्थी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसे न्यायाधीश पीएस राणा ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह मामला 2012 से लंबित है। ऐसे में इसे 3 माह में निपटाया जाए। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार डॉ. राजीव बिंदल ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सोलन की अदालत में सोफत के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दायर की है।
इसमें बताया है कि सोफत की ओर से उनके खिलाफ लगाए भ्रष्टाचार के आरोप आधारहीन हैं। इससे उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। यह भी आरोप है कि सोफत ने समाचार पत्रों के माध्यम से बिंदल के खिलाफ आरोप लगाए थे कि बिंदल के पास विधानसभा के 2012 के चुनावों से पहले 300 वर्ग मीटर जमीन थी।
चुनावों के बाद वे 300 बीघा के मालिक बन गए। आरोप है कि सोफत ने बिंदल को भ्रष्टाचार का ब्रांड एंबेसडर भी कहा था। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने प्रथम दृष्टया सोफत के खिलाफ मानहानि का मामला पाते हुए तलबी आदेश जारी किए थे।
बिंदल ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत से गुहार लगाई है कि सोफत को उनकी मानहानि के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत दंडित किया जाए। डॉ. राजीव बिंदल की ओर से अधिवक्ता सुधीर ठाकुर ने मामले की पैरवी की।