सत्र न्यायाधीश ने आरोपी पर आरोप साबित न होने से उसे बरी कर दिया था।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चचेरी बहन के साथ दुराचार के प्रयास में दोषी को तीन वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दायर अपील को मंजूर करते हुए यह सजा सुनाई।
न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने सत्र न्यायाधीश बिलासपुर के फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि आरोपी वीर सिंह ने 19 मई 2007 को अपनी चचेरी बहन की आबरू लूटने की कोशिश की थी।
मामले के अनुसार वीर सिंह ने आठ साल की अपनी चचेरी बहन जो तीसरी कक्षा में पढ़ती थी, से स्कूल से घर जाते समय दुराचार करने की कोशिश की थी। लेकिन पीड़ित और उसके भाई के शोर मचाने पर आरोपी अपने इरादे में सफल नहीं हो सका।
पीड़ित ने आरोपी द्वारा किए गए कुकृत्य को अपने घर में बताने पर अभिभावकों ने आरोपी के खिलाफ सदर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज करवाई। सत्र न्यायाधीश बिलासपुर ने आरोपी पर आरोप साबित न होने से उसे बरी कर दिया था। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।