हिमाचल प्रदेश को 21 सौ करोड़ से ज्यादा के राजस्व का चूना लगाने वाली टेक्नोमैक कंपनी के घोटाले की जांच में अब नए तथ्य सामने आने शुरू हो गए हैं। सीआईडी की अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि जिस कंपनी पर 21 सौ करोड़ के घोटाले का आरोप लगा, उसके द्वारा लोन के लिए इस्तेमाल किए गए अस्सी फीसदी बिल फर्जी थे।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आबकारी अफसरों ने बिना अपनने एंट्री बैरियर के डाटा के मिलान के ही फर्जी बिलों के आधार पर कैसे टैक्स असेसमेंट कर दिया।
यही नहीं, अगर असेसमेंट को सही भी मान लिया जाए तो करोड़ों के माल को तैयार करने के लिए आए कच्चे माल और बेचने के लिए प्रदेश से बाहर ले जाए गए बने हुए उत्पाद की जानकारी विभाग को कैसे नहीं लगी। सीआईडी अब पूरे मामले में आबकारी अफसरों की भूमिका की जांच में जुट गई है।