फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र बनाकर कोटे से जेबीटी की नौकरी हासिल करने के मामले में एक शिक्षक, पंचायत और राजस्व महकमे पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है। शिक्षक के साथियों की शिकायत पर विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। विजिलेंस से मिली जानकारी के मुताबिक फर्जी प्रमाणपत्र पर यह शिक्षक कई सालों से शिक्षा महकमे में सेवाएं दे रहे हैं।
यही नहीं पदोन्नत होकर हिंदी के प्रवक्ता भी बन गए हैं। शिक्षक के साथ पढ़ाने वाले साथियों ने विजिलेंस में शिकायत देकर कहा कि आरोपी उस फर्जी प्रमाण पत्र के दम पर नौकरी लगा है, जिसका वह कभी हकदार था ही नहीं। विजिलेंस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की और शिक्षा विभाग शिमला से संबंधित प्रवक्ता का रिकार्ड लिया।
शुरुआती छानबीन में शिकायत सही पाई गई है। आरोपी शिक्षक पर विभागीय जांच भी अलग से चली और संबंधित तहसीलदार ने भी प्रमाण पत्र को फर्जी करार दिया। अब विजिलेंस ने अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र (एसटी) बनाने वाले हिंदी के प्रवक्ता, संबंधित ग्राम पंचायत और राजस्व महकमे के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।