हिमाचल पथ परिवहन निगम की स्टैंडर्ड बस में जब स्मार्ट पुलिस को मुफ्त में सफर करवाने से कंडक्टर ने इंकार किया तो खाकी का रौब दिखाते हुए बस को थाने ले जाकर खड़ा कर दिया। बस में 31 यात्री सवार थे। पुलिस की दंबगई के आगे कोई कुछ नहीं बोल पाया।
अब ढली थाने से यह सफाई दी जा रही है कि ड्राइवर और कंडक्टर ने वर्दी नहीं डाल रखी थी। कंडक्टर के पास लाइसेंस भी नहीं था न ही दस्तावेज थे। इसलिए सरकारी बस को वह थाने ले आए। यह स्टैंडर्ड बस जेएनएनयूआरएम (2) के तहत पथ परिवहन निगम को मिली है।
इसका रूट आईएसबीटी से ढली (बाईपास रोड़) है। सामान्य बस का किराया आईएसबीटी से ढली तक 33 रुपये है लेकिन स्टैंडर्ड बस में यह किराया महज 20 रुपये है। इस बस में किसी भी तरह का स्टाफ और आईकार्ड मान्य नहीं है।
ऐसे शुरू हुई बहसबाजी
शुक्रवार दोपहर बाद स्टैंडर्ड बस नंबर एचपी -64-7605 रोज की तरह अपने रूट पर चल रही थी। भट्टाकुफर से पांच लोग बस में सवार हुए। कंडक्टर ने टिकट लेने के लिए कहा तो जवाब मिला वह पुलिस में हैं, उनके पास आई कार्ड है।
कंडक्टर ने कहा यह स्टैंडर्ड बस है इसमें आईकार्ड मान्य नहीं हैं। आपको किराया देना ही होगा। इस पर विवाद बढ़ गया और पुलिस वाले बस को थाना ढली ले आए। गौरतलब है कि परिवहन मंत्री जीएस बाली ने स्टैंडर्ड बस लांच करने से पहले कहा था कि इन बसों में सामान्य बसों से किराया कम होगा और किसी भी तरह का स्टाफ तथा पहचान पत्र मान्य नहीं होंगे।
इन बसों में काम करने वाले कंडक्टरों का कहना है कि आए दिन इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सरकार के आदेश का उल्लंघन वह नहीं कर सकते।
यह सरेआम दादागिरीः बाली
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि स्टैंडर्ड बसों को लेकर पहले ही साफ कर दिया था कि इनमें किसी तरह का पास मान्य नहीं है। इसके बावजूद अगर पुलिस ने यह कार्रवाई की है यह सरेआम दादगिरी है। विभाग से इस मामले को रिपोर्ट तलब की जाएगी।
बस को पुलिस लेकर गई थी थानेः आरएम
एचआरटीसी के आरएम लोकल देवा सेन नेगी ने कहा कि स्टैंडर्ड बसों में पुलिस सहित अन्य किसी भी तरह के आई कार्ड और पास मान्य नहीं है। भट्टाकुफर से पांच पुलिस वाले बस में चढ़े जब उनसे किराया मांगा तो उन्होंने देने से इंकार कर दिया। इसके बाद पुलिस थाना ढली के बाहर बस को ले जाकर इंपाउंड कर दिया। इस वजह से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस ने दी ये सफाई
वहीं, एएसपी सिटी भजन देव नेगी ने कहा कि ढली थाने से उन्हें बताया गया कि बस के ड्राइवर कंडक्टर वर्दी में नहीं थे। कंडक्टर के पास कोई लाइसेंस नहीं था। बस से संबंधित कोई दस्तावेज भी नहीं थे। इसलिए बस को पुलिस ने कब्जे में लिया। असल मामला क्या है? इसकी छानबीन की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पहलुओं की छानबीन कर रही है।
एचआरटीसी में भर्ती किए जाने वाले चालकों और परिचालकों के तमाम दस्तावेज देखने के बाद ही नौकरी लगती है। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस की सड़क पर की गई यह कार्रवाई क्या यात्रियों के हित में थी?
बस ले जाने से पहले क्या पुलिस ने निगम को दूसरी बस का प्रबंध करने की सूचना दी थी। अगर ऐसा नहीं किया तो फिर सड़क पर उतारे यात्रियों को हुई परेशानी का जिम्मेवार आखिर कौन है? वहीं अगर सूचना दी थी तो फिर एचआरटीसी ने क्या प्रबंध किए।