गैंगरेप मामले में दोनों आरोपियों के जुर्म कबूल करने के बाद पुलिस अब इस पहलू पर तफ्तीश कर रही है कि इससे पहले कितनी वारदातों में इनका हाथ रहा है।
ये दोनों अक्सर 103 टनल के साथ लगते जंगल में जाया करते थे। एकांत में टहल रहे प्रेमी जोड़ों को पुलिस के नाम से डरा धमका कर फंसाने की कोशिश करते थे।
जिस जगह पर छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ, वहां पर पहले से ही जमीन पर दो खाली बोरियां बिछा रखी थीं।इस वजह से भी आरोपियों पर संदेह गहरा गया है कि दोनों पेशेवर अपराधी हैं।
वारदात के बाद से फरार थे दोनों आरोपी
इनकी घिनौनी हरकत सामने आने के बाद दोनों आरोपी शिमला से फरार थे। इनमें एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सुसराल में छिपा था, दूसरा नेपाली मूल का आरोपी किन्नौर में था। वहां वह मजदूरी का काम कर रहा था।
एक आरोपी के गिरफ्त में आने के बाद उसने अपने नेपाली साथी के नाम का भी खुलासा कर दिया। पहले आरोपी खुद को बेकसूर बताते रहे लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे टूट गए।
नेपाली मूल के आरोपी की शिनाख्त सोमवार को होगी। लड़की के दोस्त ने नेपाली को पहचान लिया है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक दुल्लर ने कहा कि मामले की छानबीन चल रही है।
16 मई को किया था गैंगरेप
गैंगरेप 16 मई की शाम 103 टनल के साथ लगते जंगल में हुआ। वारदात उस समय हुई जब छात्रा अपने दोस्त के साथ जंगल में टहल रही थी। दोनों आरोपियों ने सुनसान जगह का फायदा उठाते हुए उन्हें पुलिस के नाम से डराया धमकाया। लड़की के दोस्त को भगा दिया गया। आरोपियों ने छात्रा के साथ गैंगरेप किया और फरार हो गए।
पुलिस को एक खास मुखबिर से सूचना मिली की शिक्षा महकमे में कार्यरत एक कर्मचारी कई दिन से घर से गायब है। इस पर पुलिस ने 21 मई को कर्मचारी के घर दबिश दी। पत्नी ने कहा कि आज ही वह किसी काम से शहर से बाहर गए हैं। कर्मचारी के मोबाइल पर जब कॉल करनी चाही तो स्विच ऑफ था।
पुलिस का शक बढ़ा और उन्होंने आरोपी का स्केच सरकारी कर्मचारी के आस पड़ोस में दिखाना शुरू किया। इस लीड से पुलिस को अंधेरे में आशा की कुछ किरण नजर आई। काफी दिनों की मशक्कत के बाद उसे धर लिया गया।