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सस्ते एलईडी बल्ब में करोड़ों का घपला, कंपनियों से रिकॉर्ड तलब

Tue, 14 Feb 2017 02:34 PM IST
चैतन्य ठाकुर/अमर उजाला, शिमला
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केंद्र सरकार की योजना के तहत बिजली उपभोक्ताओं को बेचे गए सस्ते एलईडी बल्ब में करोड़ों के घपले की जांच शुरू हुई है। आरोप है कि मैनपावर सर्विस मुहैया करवाने वालों ने दो कंपनियों के साथ फर्जीवाड़ा कर करीब 3,5,79,780 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। कोर्ट के आदेश पर सीआईडी थाना भराड़ी ने एफआईआर दर्ज कर कंपनियों से रिकॉर्ड तलब कर लिया है। 
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शिकायतकर्ता दीपेंद्र कुमार ग्लोबल आईटी सर्विसिज बीका जी कांप्लेक्स नई दिल्ली की शिकायत के आधार पर कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। बता दें कि बल्ब खरीदने के लिए बिजली बिल दिखाना जरूरी किया गया था, जिसका फायदा उठाकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है। 

जिन उपभोक्ताओं ने कैश देकर बल्ब खरीदे, उनके बिजली बिल में यह राशि किस्तों में दिखाई गई। नौ किस्तों में यह बल्ब उपभोक्ता को 105 रुपये में पड़ना था। अधिकांश एलईडी की सेल ईएमआई में ही दिखाई जाती रही।  प्रदेश के आठ सर्किलों में एलईडी बल्ब का वितरण 15 अगस्त 2015 से शुरू हुआ और जनवरी 2016 के पहले सप्ताह तक चला।
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100 रुपये में बेचा एक एलईडी बल्ब

सीआईडी का कहना है कि केंद्र सरकार की डोमेस्टिक  एफिशिएंसी लाइट प्रोग्राम (उजाला) के तहत एलईडी बल्ब वितरित किए गए। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी पर सस्ती दरों पर एलईडी बल्ब दिए गए। इसमें टेंडर हुए और हिमाचल का काम स्ट्रेटेजिक आउटसोर्सिंग सर्विस प्राइवेट लिमिटेड कर्नाटक को मिला। 

इसमें आठ सर्किल में एलईडी बांटे जाने थे। इनमें रामपुर, मंडी, मनाली, हमीरपुर , सोलन, ऊना, शिमला, बिलासपुर और डलहौजी शामिल थे। इस कंपनी ने आगे ग्लोबल आईटी सर्विस को काम सबलेट किया। ग्लोबल आईटी ने आगे मैन पावर सर्विस का काम

किसी और को दे दिया। अब आरोपों के घेरे में मैन पावर सर्विस देने वाले लोग आ रहे हैं, जिन पर ग्लोबल आईटी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इन्होंने फर्जी दस्तावेजों की मदद से करोड़ों का घपला किया है। इन्होंने कंपनियों के साथ साथ उपभोक्ताओं को भी चपत लगाई है। 

उपभोक्ता को एक एलईडी बल्ब 100 रुपये में बेचा गया। इसमें उपभोक्ता को अपना बिजली बिल दिखाना जरूरी था। उपभोक्ता किस्तों में बल्ब की खरीद कर सकते थे। इसके लिए उन्हें पहले डाउन पेमेंट के तौर पर 10 रुपये देने थे और बाकी किस्तों में पैसा चुकाना था।

किस्त में उन्हें एक बल्ब के 105 रुपये देने थे। किस्त का यह पैसा बिजली बिल में प्रति महीने उपभोक्ता के बिल में आना था। आरोप है कि इसमें प्रति बल्ब 90 रुपये का गोलमाल हुआ है। 
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