हिमाचल प्रदेश के एकमात्र सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कॉलेज संजौली में हुए करीब 80 लाख के घोटाले की जांच विजिलेंस ने पूरी कर ली है। जांच में तत्कालीन प्राचार्य एवं पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक और वरिष्ठ सुपरिंटेंडेंट के खिलाफ घपले के सुबूत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार जांच में पता चला है कि कॉलेज में ढाई साल तक कैश बुक नहीं भरी गई। विभिन्न सामान की खरीद, हॉस्टल फीस, बिलों और सरकार से मिली ग्रांट की राशि में यह गबन किया गया। अब ब्यूरो ने मामले की चार्जशीट तैयार करनी शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग से भी पूर्व अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगने की कवायद शुरू कर दी है।
माना जा रहा है कि अभियोजन स्वीकृति मिलते ही ब्यूरो कोर्ट में इस मामले से संबंधित चार्जशीट दाखिल कर देगा। बता दें कि साल 2016 में पूर्व प्राचार्य ने तत्कालीन सीनियर असिस्टेंट से कैश बुक का ब्योरा मांगा था। अधिकारी ने रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए कुछ समय मांगा तो प्राचार्य ने इसकी सूचना शिक्षा निदेशालय को भेज दी। इस पर तत्कालीन शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी ने जांच के आदेश दे दिए। प्रारंभिक जांच में सीनियर असिस्टेंट पर लगे आरोप सही पाए गए। इसके आधार पर अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद सरकार ने मामले की विजिलेंस जांच के आदेश दिए। ब्यूरो ने करीब पांच साल तक जांच करने के बाद अब मामले में चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।