एक करोड़ के बोनस का झांसा देकर रिटायर्ड अधिशासी अभियंता से 15 लाख ऐंठने के आरोप में जांच के घेरे में आए एक रिटायर्ड बैंक अफसर ने जहर खाकर जान दे दी। ठगी के मामले में पुलिस बैंक अफसर से पूछताछ करने के लिए हरियाणा जाने वाली थी लेकिन पुलिस के वहां पहुंचने से पहले ही बैंक अधिकारी ने जहर खाकर जान दे दी।
इस मामले में पकड़े आरोपी से पूछताछ के बाद बैंक अफसर का नाम सामने आया था। बैंक मैनेजर की मौत के बाद यह पता लगा पाना मुश्किल है कि ठगी का पैसा किसके पास जाता था। पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी महज एक मोहरा है। धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने सदर बाजार करनाल हरियाणा के रहने वाले दीपक शर्मा को गिरफ्तार किया था।
वह एक निजी कंपनी में सेल्स मैनेजर की नौकरी करता है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोपी दीपक शर्मा के खाते में साढ़े आठ लाख रुपये जमा करवाए थे। पूछताछ में दीपक ने कुछ और लोगों के नामों का खुलासा किया है।
ऐसे चल रहा था ठगी का कारोबार
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि उसने यह बैंक खाता अपनी पत्नी के चाचा के कहने पर खुलवाया था। वह बैंक से रिटायर्ड हैं उसने कहा था कि इस खाते में जितना पैसा आएगा उसका कुछ कमीशन उसे दे दिया जाएगा। आरोपी का कहना है कि जितना पैसा आता था वह चाचा के सुपुर्द कर देता था। अब वह पैसा किसको आगे देता था इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है।
इस खुलासे के बाद बैंक अधिकारी से पूछताछ के लिए एक टीम हरियाणा रवाना की जा रही थी। लेकिन पुलिस को अंदेशा है कि उनके आने की खबर पहले ही वहां पहुंच गई होगी। पूछताछ से बचने के लिए उसने जहर निगल लिया तथा अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
एएसपी सिटी भजन देव नेगी ने कहा कि इस मामले में जांच के दायरे में आए आरोपी दीपक की पत्नी के चाचा ने जहर खाकर जान दे दी। उनसे पूछताछ के लिए एक टीम हरियाणा भेजी जा रही थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने भी संजौली चौकी में एक शपथपत्र देकर आरोपी दीपक वाले मामले में केस विड्रा करने के लिए कहा है।
एक करोड़ के बोनस का झांसा देकर ऐंठे थे पैसे
संजौली के रहने वाले रिटायर्ड अधिशासी अभियंता ने रिलायंस कंपनी की एक इंश्योरेंस पालिसी ले रखी हैं। इन्हें एक कॉल आया और पॉलिसी के बारे में पूछने लगे। शिकायतकर्ता को लगा कि यह कॉल इंश्योरेंस कंपनी से आ रहा है। कहा कि पालिसी की स्टेटमेंट उन्हें समय पर नहीं मिल रही है।
इसके बाद शातिरों ने इन्हें झांसे में लिया और कहा कि आप ने जो पालिसी ले रखी है उसमें एक करोड़ का बोनस बनता है। यह रकम आपको दे रहे हैं लेकिन इससे पहले टैक्स के तौर पर पैसा देना होगा। हामी भरने के बाद शातिरों ने उनसे किस्तों में अलग-अलग खातों में पैसा डलवाने के लिए कहा। यह सिलसिला जुलाई से अक्तूबर तक चलता रहा।
इस दौरान अधिशासी अभियंता सेवानिवृत्ति के समय मिले सारे पैसे लुटा चुके थे। इसके बाद शातिरों ने मोबाइल नंबर भी बंद कर दिए। इस मामले की जानकारी संजौली पुलिस को दी और मुकदमा दर्ज हुआ। जांच में पाया गया कि पंद्रह लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा करवाया गया था।