जेल उप अधीक्षक विकास भटनागर ने बताया कि नेपाल मूल का अर्जुन मानसिक रूप से बीमार था और वह दवाइयां भी खाता था। जेल प्रशासन ने एक अगस्त से उसे लंगर कमांडर बनाया था।
सुबह जब सभी कैदी अपने-अपने कार्य को निकले तो वह तबीयत ठीक न होने की बात कहकर बैरक में रुक गया। सीसीटीवी कैमरे में उसे लंगर की बैरक के बाहर टहलते हुए देखा गया। सुबह 8:22 मिनट पर कैदी बैरक की ओर गया।
बैरक के अंदर से हाथ डालकर उसने कुंडी लगा ली। इसके बाद करीब सवा नौ बजे एक अन्य कैदी उस तरफ गया और उसे फंदे से लटका देख उसने तुरंत जेल प्रशासन को बताया। उसे नाहन मेडिकल कॉलेज लाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
एएसपी वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। मामले की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। सीजेएम नाहन ने मामले को लेकर जेल का दौरा भी किया।
आदर्श केंद्रीय कारागार नाहन की बैरक में सजायाफ्ता कैदी के फंदा लगाने से कई सवाल उठ रहे हैं। जेल महानिदेशक सोमेश गोयल एक भवन का उद्घाटन करने जेल आ रहे थे। जेल प्रशासन इसकी तैयारियों में जुटा था कि बैरक में उम्रकैद की सजा काट रहे अर्जुन बहादुर ने फंदा लगा लिया। उसने अपने हाथ में दो ऐसे लोगों के नाम लिखे हैं, जो उसके साथ जेल में कैदी थे। जेल में कैदी की आत्महत्या ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
अर्जुन बहादुर ने बैरक में फंदा लगाने से पहले हाथ में दो कैदियों के नाम लिखे थे। पुलिस के अनुसार कुछ अरसे पहले इन्हीं कैदियों के साथ उसकी मामूली कहासुनी हुई थी। वह कुछ अरसे से मानसिक रूप से परेशान था। इसकी बाकायदा दवाइयां भी ले रहा था। जेल में उसका चालचलन भी ठीक था। उसने टेलरिंग का कार्य भी किया। एक अगस्त से उसे एक महीने के लिए लंगर में लगाया गया। उसे लंगर कमांडर की जिम्मेदारी दी गई थी।
लंगर में कार्य करने के दो दिन बाद ही उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। हालांकि, पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का माना जा रहा है, लेकिन, आत्महत्या से पहले उसने दो नाम क्यों लिखे? इस पर पुलिस जांच कर रही है। नाहन जेल में लगभग 500 कैदी हैं। इनकी निगरानी के लिए 65 वार्डर और 17 होमगार्ड जवान तैनात हैं। 31 सीसीटीवी कैमरों के लिए दो स्क्रीन लगी हैं।
महज दो स्क्रीन के सहारे 31 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी जेल प्रशासन के लिए आसान नहीं है। जेल उप अधीक्षक विकास भटनागर ने बताया कि जेल में तमाम व्यवस्थाएं पुख्ता हैं। 31 सीसीटीवी कैमरे जेल परिसर में लगाए हैं। जिनकी निगरानी दो स्क्रीन पर की जाती है। एक स्क्रीन पर छोटे-छोटे टुकड़ों में पूरे परिसर की निगरानी करना भी आसान नहीं है।