हिमाचल के जिला मंडी स्थित बालीचौकी सराजघाटी के प्रसिद्ध देवता कोटलु के देवरथ से चोर मुखौटे (मोहरे) निकाल ले गए। इसमें तीन मोहरे पीतल के और एक मोहरा अष्टधातु का है।
अष्टधातु के मोहरे की कीमत छह से आठ लाख के बीच बताई जा रही है। मंदिर कमेटी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्जकर छानबीन शुरू कर दी है।
जिला में मंदिरों से चोरी की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। पुलिस के अनुसार देवता का देवरथ बागी गांव में कोट (स्थानीय भाषा में जहां देवता का रथ रखा जाता है उसे कोट कहा जाता है) में था।
बीती रात चोरों ने मंदिर में घुसकर रथ पर लगे चारों मोहरे निकाल लिए। देवता के पुजारी हेतराम रात करीब नौ बजे देवता की पूजा करने के बाद दूसरे कमरे में सोने चले गए थे।
सुबह देवता की पूजा के लिए आए तो देवता के रथ पर कोई मोहरा न देखकर दंग रह गए। देवता के रथ का लकड़ी का ढांचा ही बचा हुआ था। मुखौटे गायब थे। डीएसपी कुलभूषण ने बताया कि छानबीन शुरू कर दी है।
पंचायत प्रधान भूमे राम ने बताया कि देवता के मुख्य मुखौटे की कीमत करीब छह से आठ लाख के बीच है। इसके अलावा चोरी हुए सभी मुखौटे पीतल के थे। इन्हें भी चोर सोने का समझकर ले उड़े।
देवता का मंदिर डीडर गांव में है। लेकिन देवरथ बागी गांव स्थित कोट में रखा जाता है। घटना की सूचना मिलने पर बालीचौकी से पुलिस ने मौके का जायजा लिया।