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हिमाचल प्रदेश: चिकित्सीय लापरवाही पर अस्पताल और डॉक्टर को एक लाख हर्जाना

Sun, 25 Nov 2018 12:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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जिला उपभोक्ता फोरम ने मंडी के एक निजी अस्पताल की ओर से चिकित्सीय लापरवाही बरतने पर उपभोक्ता के पक्ष में एक लाख रुपये हर्जाना अदा करने का फैसला सुनाया है। उपभोक्ता को दवाइयों का खर्चा लौटाने तथा 20,000 रुपये शिकायत व्यय भी अदा करने के आदेश दिए हैं।

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जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष राजन गुप्ता तथा सदस्यों विभूति शर्मा एवं आकाश शर्मा ने पधर तहसील के पुंडल (गवाली) गांव निवासी सविता पत्नी नवनीत मेहता की शिकायत को उचित मानते हुए मंडी के निजी अस्पताल तथा वहां तैनात

चिकित्सक को संयुक्त रूप से चिकित्सकीय लापरवाही बरतने पर एक लाख रुपये बतौर हर्जाना अदा के आदेश दिए हैं। इसके अलावा फोरम ने अस्पताल को दवाइयों और इलाज का खर्चा 1863 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के भी आदेश दिए हैं।

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प्रेगनेंसी न कहकर चिकित्सक करते रहे डायग्नोज 

अधिवक्ता भंवर भारद्वाज के माध्यम से फोरम में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता के पहले प्रसव के बाद चिकित्सकों ने उन्हें हिदायत दी थी कि वह भविष्य में प्रसव का रिस्क न लें। दिसंबर 2015 और जनवरी 2016 में उन्होंने अस्पताल में चिकित्सकों से चेकअप करवाया।

अल्ट्रासाउंड करवाने के बाद बताया कि उन्हें प्रेगनेंसी नहीं है। उन्हें दवाइयां खाने को दीं तथा समय-समय पर अस्पताल में चेकअप के लिए आने की हिदायत दी थी। मार्च 2016 में उन्हें प्रेगनेंसी की संभावना लगी। उन्होंने एक अन्य निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाया तो वहां पर प्रेगनेंसी का पता चला। 
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इन आरोपों के तहत याचिका हुई दायर 

उपभोक्ता के मुताबिक अस्पताल में चिकित्सीय लापरवाही के कारण उनके प्रसव का पता नहीं लगाया जा सका और उन्हें गलत दवाइयां दी जाती रहीं। उपभोक्ता को इस अवांछित प्रसव को समाप्त करने (एमटीपी) का कदम उठाना पड़ा।

इसके कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ऐसे में उपभोक्ता ने अस्पताल की चिकित्सकीय लापरवाही के चलते उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर की थी। 

फोरम ने फैसले में यह कहा 
फोरम ने अपने फैसले में कहा कि उक्त अस्पताल उपभोक्ता को प्रेगनेंसी बताने में असफल रहा है। इसके कारण उपभोक्ता को प्रसव को समाप्त करने (एमटीपी) जैसा कदम उठाना पड़ा। अस्पताल की कार्यप्रणाली निर्धारित मापदंडों से निम्न स्तर की रही है जो स्पष्ट रूप से चिकित्सकीय लापरवाही है।
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