हिमाचल में मौजूदा समय में पेट्रोल पर 26 और डीजल पर 15 फीसदी वैट लगता है। प्रदेश से बाहर से आयातित वस्तुओं का विभागीय बैरियरों पर रिकॉर्ड रखा जाता है। उस रिकॉर्ड से मिलान करने पर पाया गया कि व्यापारी ने वित्त वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 की पहली छमाही में लगभग 4 करोड़ के पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री को छिपा लिया था।
अब कारोबारी ने मांगा दो महीने का समय- मामले के खुलासे के बाद कारोबारी ने स्वीकार किया कि उससे गलती हो गई। उसने तर्क रखा कि बहुत से ठेकेदार उधारी पर डीजल-पेट्रोल खरीदते हैं और समय पर पैसों का भुगतान नहीं करते।
हालांकि कारोबारी ने यह भी माना कि सामान उधार देने या नकदी प्राप्त करने का कर अदायगी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। कारोबारी ने 1 करोड़ 28 लाख में से 90 लाख रुपये सरकारी कोष में जमा करवा दिए हैं और शेष बची राशि को जमा करवाने के लिए विभाग से दो महीने का समय मांगा है।