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टैक्स चोरी पर पेट्रोल पंप संचालक को 1.28 करोड़ का लगाया जुर्माना

Mon, 01 Oct 2018 03:54 PM IST
चैतन्य ठाकुर, अमर उजाला, शिमला
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शिमला का एक पेट्रोल पंप संचालक करोड़ों की टैक्स चोरी करते हुए पकड़ा गया है। कारोबारी की गतिविधियों पर संयुक्त आयुक्त राज्य कर आबकारी दक्षिणी प्रवर्तन क्षेत्र परवाणू नजर रखे हुए थे। प्रदेश से बाहर से आयातित वस्तुओं का विभागीय बैरियरों पर रिकॉर्ड रखा जाता है उस रिकॉर्ड से मिलान करने पर ही कारोबारी की टैक्स चोरी पकड़ में आई। यह कार्रवाई हिमाचल मूल्य वर्धित कर अधिनियम 2005 के तहत की गई।

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पकड़ में आने के बाद अब कारोबारी ने एक करोड़ 28 लाख में से 90 लाख रुपये सरकारी कोष में जमा करवा दिए हैं और शेष राशि को जमा करवाने के लिए दो महीने का समय मांगा है। महकमे को कुछ महीने पहले गुप्त सूचना मिली थी कि शिमला जिला का एक पेट्रोल पंप संचालक टैक्स अदा करने में हेराफेरी कर रहा है। यह कारोबारी हर साल करोड़ों मूल्य का पेट्रोल और डीजल प्रदेश के बाहर से आयत करता था लेकिन कर अदायगी नियमों के अनुसार नहीं कर रहा था।

विभागीय जांच में पाया गया कि कारोबारी जितने मूल्य का पेट्रोलियम पदार्थ प्रदेश के बाहर से आयत करता था उससे भी कम टर्न ओवर की बिक्री दिखा रहा था। विभाग को कर अदा करते एवं रिटर्न भरते समय यह कारोबारी बिक्री का एक बड़ा हिस्सा अपनी सेल टर्न ओवर से गायब कर देता था, शेष राशि पर वह समयानुसार टैक्स दे देता था।
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इस तरह यह हर साल एक से डेढ़ करोड़ के पेट्रोलियम पदार्थ पर देय वैट का सरकारी खजाने को चूना लगा रहा था। संयुक्त आयुक्त डॉ. सुनील कुमार (राज्य कर एवं आबकारी दक्षिणी प्रवर्तन क्षेत्र परवाणू) ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि जिला शिमला के एक पेट्रोल पंप संचालक पर टैक्स चोरी मामले में 1 करोड़ 28 लाख का जुर्माना लगाया गया है। कारोबारी पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

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ऐसे पकड़ में आया कारोबारी

हिमाचल में मौजूदा समय में पेट्रोल पर 26 और डीजल पर 15 फीसदी वैट लगता है। प्रदेश से बाहर से आयातित वस्तुओं का विभागीय बैरियरों पर रिकॉर्ड रखा जाता है। उस रिकॉर्ड से मिलान करने पर पाया गया कि व्यापारी ने वित्त वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 की पहली छमाही में लगभग 4 करोड़ के पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री को छिपा लिया था। 

अब कारोबारी ने मांगा दो महीने का समय- मामले के खुलासे के बाद कारोबारी ने स्वीकार किया कि उससे गलती हो गई। उसने तर्क रखा कि बहुत से ठेकेदार उधारी पर डीजल-पेट्रोल खरीदते हैं और समय पर पैसों का भुगतान नहीं करते।

हालांकि कारोबारी ने यह भी माना कि सामान उधार देने या नकदी प्राप्त करने का कर अदायगी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। कारोबारी ने 1 करोड़ 28 लाख में से 90 लाख रुपये सरकारी कोष में जमा करवा दिए हैं और शेष बची राशि को जमा करवाने के लिए विभाग से दो महीने का समय मांगा है।
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