जिला मुख्यालय हमीरपुर के एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान बच्चे की मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अस्पताल प्रबंधन ने प्रदेश से बाहर से गायनी विशेषज्ञ बुलाकर ऑपरेशन करवाने की बात कही थी, लेकिन पुलिस पूछताछ में संबंधित डॉक्टर ऑपरेशन के वक्त हमीरपुर में नहीं पाई गई।
ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के साथ उक्त डॉक्टर के खिलाफ भी धारा 420 के तहत केस दर्ज कर लिया है। उधर, मामले में सरकार ने भी जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब कर ली है। पुलिस में केस दर्ज होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली है। पहले हमीरपुर कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी गई थी, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया।
आरोप है कि 36 हजार रुपये फीस लेकर प्राइवेट अस्पताल ने गर्भवती महिला का सीजेरियन के जरिए प्री मैच्योर डिलिवरी एक बीएएमएस डॉक्टर से करवा दी। स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक प्री-मैच्योर डिलीवरी को निक्कु-पिक्कू समेत गायनी विभाग के विशेषज्ञों की टीम अनिवार्य होती है। यह सुविधा टांडा और आईजीएमसी के अलावा चुनिंदा अस्पतालों में है।
परिजन बोले - नहीं लौटी दूसरे बच्चे की आंखों की रोशनी
पीड़ित महिला के ससुर अजीत सिंह ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि प्राइवेट अस्पताल में प्री-मैच्योर डिलीवरी के समय महिला से दो जुड़वां बच्चे हुए थे। लड़के की टांडा ले जाते वक्त रास्ते में मौत हो गई, जबकि लड़की की आंखों की रोशनी चली गई। नवजात पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती है, लेकिन ऑपरेशन के बाद भी आंखों की रोशनी नहीं लौटी है।
अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टर पर 420 का केस
एडिशनल एसपी डॉ. शिव कुमार ने कहा कि पुलिस ने पहले अस्पताल प्रबंधन पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया था। अस्पताल प्रबंधन के साथ अब प्रदेश से बाहर की एक डॉक्टर पर भी धारा 420 के तहत केस दर्ज किया गया है। जिस डॉक्टर से प्रसव करवाने की बात अस्पताल प्रबंधन कर रहा है, वह उस वक्त हमीरपुर में नहीं थीं।
पीड़ित को न्याय दिलाने का प्रयास: एसडीएम
एसडीएम आईएएस अरिंदम चौधरी ने कहा कि पुलिस विभाग के साथ बैठकर मामले पर चर्चा की गई है। पीड़ित को न्याय दिलाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। हमीरपुर कोर्ट से अस्पताल प्रबंधन की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी दी थी। यहां से उन्हें जमानत मिली है।
जिला प्रशासन को सौंपी रिपोर्ट: सीएमओ
सीएमओ डॉ. सावित्री कटवाल ने कहा कि जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट सौंप दी है। प्राइवेट अस्पतालों की मान्यता के बारे में पूछने पर बोले - आवेदन के समय उन्होंने गायनी समेत सभी विशेषज्ञों का जिक्र किया था। बाद की जानकारी नहीं।