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सिर्फ गहनों के खातिर बुढ़ापे में आकर खून से रंग लिए हाथ

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राजधानी के कृष्णानगर की प्रकाशो (68) की हत्या के मामले में गिरफ्तार ऊषा ने पुलिस पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। हत्या गहनों के खातिर ही की गई। पुलिस के मुताबिक गहनों के लालच में आकर ऊषा ने पहले प्रकाशो को अपने जाल में फंसाया फिर लक्कड़ बाजार स्थित अपने जान पहचान वाले व्यक्ति स्वर्णा के कमरे में ले गई। वारदात वाले दिन स्वर्णा लाल वहां नहीं था। लिहाजा मौका पाकर ऊषा ने प्रकाशो को ठिकाने लगा दिया।
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हत्या ऊषा के लापता होने वाले दिन यानि दस सितंबर को ही कर दी थी। हत्या के बाद ऊषा वहां से निकल गई। पुलिस अब महिला को कोर्ट में पेश करने के बाद उड़ाए गए गहनों की महिला की निशानदेही पर बरामदगी करेगी। हत्या के आरोप में पकड़े गए जालंधर के स्वर्णा लाल का इस हत्या में किस हद तक हाथ है, इसका पता भी पुलिस लगा रही है। इसके लिए स्वर्णा के मोबाइल कॉल और लोकेशन रिकार्ड तथा जालंधर में उसके घर वालों से उसकी वहां मौजूदगी के साक्ष्य जुटाएगी।

स्वर्णा ने पुलिस को बयान दिया है कि वह 27 अगस्त के बाद शिमला आया ही नहीं। पुलिस को आरोपी महिला ने बताया है कि मृतका प्रकाशो के गहनों को उड़ाने के चक्कर में एक सप्ताह से उससे मेलजोल बढ़ाया था। हत्या के रोज मृतका के साथ ऊषा के देखे जाने के गवाह मिलने पर पुलिस ग्यारह सितंबर से ही उसका पीछा कर रही थी। ऊषा उसके बाद पिंजौर, फिरोजपुर, अंबाला और रुड़की में अपने रिश्तेदारों के यहां घूमती रही। पुलिस ने शव के मिलने के रोज ही उसे पिंजौर से पकड़ लिया और शिमला लेकर आ गई।
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आरोपियों की आपस में थी जान पहचान- डीएसपी सिटी बलबीर जसवाल ने बताया कि आरोपी महिला ऊषा (60) और फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर के एजेंट स्वर्णा लाल (65) जिसके कमरे से शव बरामद हुआ है दोनों एक दूसरे को जानते थे। यह बात दोनों ने कबूल की है। स्वर्णा के हत्या में शामिल होने के ठोस साक्ष्य अभी नहीं मिले हैं।

स्वर्णा ने बयान दिया है कि 27 अगस्त के बाद वह शिमला आया ही नहीं था। कमरे की चाबी एक ऊषा और दूसरी स्वर्णा के पास रहती थी। जब वह 17 सितंबर को अपने कमरे में सोने पहुंचा तो वहां उसने महिला की लाश देखी और पुलिस को सूचित किया।

मोबाइल कॉल भी खोलेगी राज

डीएसपी बलबीर जसवाल ने कहा कि हत्या दोनों ने मिलकर की है या स्वर्णा इसमें शामिल था या नहीं इसकी छानबीन पुलिस मोबाइल कॉल तथा लोकेशन के साथ उसके बयान के मुताबिक जालंधर से करेगी। कहा कि चुराए गहने महिला ने कहां रखे हैं, इसकी निशानदेही पर उसे पुलिस बरामद करेगी।

पहले भी बनाया था हत्या का प्लान- हत्या की आरोपी ऊषा ने माना कि वह गहने उड़ाने के चक्कर में प्रकाशो को पहले भी एक बार रिवोली में स्वर्णा लाल के कमरे में लेकर आई थी। लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई। दस सितंबर को वह उसे कमरे में लेकर आई और उसने बेलन से उसके सिर के पिछले हिस्से पर वार कर दिया। इसके बाद उसके मुंह पर रजाई रखकर उस पर तब तक बैठी रही जब तक वो शांत नहीं हो गई। फिर यहां कमरे में कुंडी लगाकर पिंजौर में रहने वाले अपने बेटे के घर चली गई।

12 सितंबर को पुलिस ने कर लिया था ट्रेस- डीएसपी बलबीर जसवाल के मुताबिक दस सितंबर को परिजनों के आरोपों और प्रकाशो के साथ ऊषा को देखे जाने के गवाह मिलने पर पुलिस ने ऊषा को उसके मोबाइल पर संपर्क किया। उसे शिमला लौटने को कहा। 12 सितंबर को वह पुलिस के कहने पर शिमला के लिए बस में सनवारा तक आई भी लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई और बीच रास्ते से फिर लौट गई।

इसके बाद उसने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया। बीच में मोबाइल ऑन होने पर पुलिस टीम बराबर उसका पीछा करती रही। 14 सितंबर तक महिला का पीछा करते हुए फिरोजपुर, रुड़की और अंबाला तक महिला के पीछे पुलिस चलती रही। 17 सितंबर की रात को पुलिस उसे अंबाला से पकड़कर शिमला ले आई।
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कत्ल के आरोप में फंसी महिला देख चुकी है जिंदगी के 60 बसंत

राजधानी की कृष्णानगर की प्रकाशो (68) की हत्या में गिरफ्तार आरोपी महिला ऊषा की उम्र भी 60 साल है। ऊषा के बच्चे भी बड़े हो चुके हैं। जिंदगी के साठ बसंत देख चुकी ऊषा के मन में गहनों का लालच इस कदर हावी हो गया कि वो एक कत्ल कर बैठी। अभी तक की कत्ल की कहानी के खुले राज यही कह रहे हैं कि हत्या महज गहनों के खातिर ही हुई है।

यही नहीं हत्या के आरोप में पकड़ी गई बुजुर्ग महिला ऊषा ने पूरी साजिश के साथ इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के रिकार्ड के मुताबिक आरोपी महिला के खिलाफ पहले कोई मामला पुलिस के पास दर्ज नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि एक बुजुर्ग महिला कैसे हत्या का रास्ता गहनों के खातिर अपना बैठी।

साठ साल की इस जिंदगी में आरोपी महिला ने कई बच्चों को अपने गोद में खिला होगा। ऐसे में गहनों के खातिर उसका दिल इस उम्र में आकर इतना कठोर हो गया कि वो हत्या कर बैठी। हत्या का यह मामला हर किसी को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि आधुनिकता की चकाचौंध में रिश्ते और प्यार भाव का क्या मोल किस तरह सिमटता जा रहा है।
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