नकल के लिए अक्ल का इस्तेमाल हुआ। लेकिन किसी भेदी ने लंका ढहा दी। अगर पुलिस को शिकायती पत्र नहीं मिलता तो ये शातिर दिमाग आने वाले दिनों में हिमाचल पुलिस का हिस्सा होते। पुलिस जरूर वक्त रहते शातिरों तक पहुंच गई लेकिन इस घटना से पुलिस की भर्ती परीक्षा सवालों के घेरे में आ गई है।
अभ्यर्थी पूरी किट पहनकर भीतर दाखिल हुए। किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। हाइटेक नकल का मास्टर माइंड शिक्षा विभाग में कार्यरत सीनियर असिस्टेंट रमनदीप बताया जा रहा है। पुलिस ने मामले में अभी किसी को मुख्य आरोपी नहीं बनाया है। आईपीसी की
धारा-420 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। आईटीएक्ट की अन्य धाराएं भी जुड़ सकती हैं। पुलिस कांस्टेबल भर्ती में हाइटेक नकल का यह अपनी तरह का पहला और सबसे सनसनीखेज केस सामने आया है।
पुलिस परीक्षा पर असर नहीं, आज निकलेंगे रिजल्ट
गिरफ्तार किए गए आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के मुताबिक रमनदीप ने प्रश्नपत्र हल करवाने की एवज में गुरप्रीत से तीन लाख रुपये लिए थे। वहीं, सुशील ने 25000 रुपये इलेक्ट्रानिक किट खरीदने को दिए थे। पुलिस को शक है कि रमनदीप ने अन्य विभागों की भर्ती परीक्षा में भी नकल करवाई होगी। उसके साथ कुछ और सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता की भी आशंका है।
लिहाजा, कुछ और सरकारी कर्मचारी पुलिस की रडार पर हैं। उधर, हाइटेक नकल से यह तो साफ हो गया है कि अब इस तरह की भर्ती परीक्षाएं करवाने में आयोजकों को भी हाइटेक तकनीक का इस्तेमाल करना होगा। हालांकि, मामले में किसी पुलिस कर्मचारी की संलिप्तता से पुलिस अधिकारियों ने मना किया है, लेकिन और सरकारी कर्मचारी शामिल होने की संभावनाओं से इनकार भी नहीं किया।
आईजी ने एसपी सौम्या और सिरमौर पुलिस टीम की सराहना की। कहा कि गुमनाम शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की। मामला उजागर होने के बाद अब प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साक्षात्कार प्रक्रिया रविवार शम तक पूरी कर ली जाएगी। इसके तुरंत बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
सामान्य था तरीका, पता लगाना मुश्किल
आईजी के अनुसार परीक्षा केंद्रों की बाकायदा वीडियोग्राफी करवाई गई थी। इसे पूरी तरह से खंगाला गया। वीडियो रिकार्डिंग में परीक्षार्थियों का व्यवहार सामान्य था। उनके अनुसार इस तकनीक में किसी भी तरह का बटन नहीं दबाना था।
नकल में तीन व्यक्ति परीक्षा केंद्रों के समीप लैपटॉप के माध्यम से प्रश्नपत्र हल करवा रहे थे। पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दूसरे परीक्षा केंद्रों में इस तकनीक से नकल की आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। इस दिशा में भी जांच चल रही है।