हमीरपुर जिला मुख्यालय के साथ लगते उप महाल विकास नगर में सौ कनाल सरकारी भूमि को मलकीयत में तबदील कर रसूखदारों की ओर से उसे करोड़ों रुपये में बेचने के मामले में शुक्रवार को एसडीएम हमीरपुर शिल्पी बेक्टा ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने शुक्रवार को मौके पर जाकर विवादित भूमि का निरीक्षण किया। उनके साथ राजस्व और बंदोबस्त विभाग तथा पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
करीब एक सप्ताह पहले गांव के एक दर्जन बाशिंदों ने उपायुक्त कार्यालय हमीरपुर पहुंच कर सरकारी भूमि को मलकीयत भूमि में तबदील करने के बारे में उपायुक्त हमीरपुर डॉ. रिचा वर्मा को शिकायत पत्र सौंपा। विकास नगर के रहने वाले फिल्लू राम ने कहा कि कुछ रसूखदारों ने करीब सौ कनाल सरकारी जमीन मलकीयत भूमि में तबदील कर उसे लगभग 15 करोड़ में बेच दिया है।
उन्होंने 7 जुलाई तक इस मामले की जांच शुरू नहीं करने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है। फिल्लू राम का कहना है कि 2006-07 में हुए बंदोबस्त की नवीन अक्श नक्शा मुसाबी के खसरा नंबर इस्तेमाल साल 1965-66 से कहीं नहीं मिल रहे हैं। शिकायत के बावजूद पुराने रिकॉर्ड को नष्ट कर मामले को दबाने का प्रयास राजस्व विभाग कर रहा है।
इस बारे में 2012 में भी शिकायत की गई थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि कुछ रसूखदारों ने प्रदेश सरकार को धोखा देकर यह जमीन हड़प ली है। फिल्लू राम का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है और विभाग अपने अधिकारियों को बचाने के चक्कर में है।
इस कारण वह 7 जुलाई से गांधी चौक पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उनके साथ अन्य लोग भी होंगे, लेकिन भूख हड़ताल पर वह अकेले बैठेंगे। वहीं, एसडीएम शिल्पी बेक्टा का कहना है कि ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर प्वाइंट वाई प्वाइंट मामले की जांच की जा रही है। राजस्व और बंदोबस्त विभाग के साथ मिलकर विवादित खसरा नंबर की सेटलमेंट कर रहे हैं। लोगों के बयान लिए गए हैं और बजट आने पर बुर्जियां लगाई जाएंगी।