राजधानी शिमला स्थित एक्सीलेंस कॉलेज संजौली में 80 लाख रुपये के गबन की फाइल फिर खुल गई है। मामले में चार्जशीट किए गए अधीक्षक के पत्र पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने साल 2016 से लंबित जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज को भेजी है। शिक्षा सचिव ने सरकार से इस मामले में आगामी कार्रवाई करने की मंजूरी मांगी है।
जांच की फाइल दोबारा खुलने से शिक्षा निदेशालय और हिमाचल विश्वविद्यालय के उच्च पदों पर नियुक्त दो पूर्व प्रिंसिपलों पर गाज गिर सकती है। साल 2016 के दौरान संजौली कॉलेज में 80 लाख रुपये का गबन होने का मामला सामने आया था। ढाई साल से कैश बुक नहीं भरने की शिकायत मिलने पर शिक्षा निदेशालय ने मई 2016 में मामले की जांच के आदेश दिए थे। शिकायत की प्रारंभिक जांच के दौरान ही सीनियर असिस्टेंट को सस्पेंड कर दिया था।
सरकारी धनराशि के इस घोटाले में कॉलेज के कई अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता का अंदेशा भी जांच रिपोर्ट में जताया गया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक कॉलेज में ढाई साल से कैश बुक नहीं भरी गई। कॉलेज प्रशासन की ओर से सामान की खरीद, हॉस्टल फीस, विभिन्न बिलों की अदायगी और सरकार से मिली ग्रांट का कहीं भी कोई ब्योरा नहीं रखा गया है।
जांच के दौरान 80 लाख रुपये के गोलमाल की बात सामने आई। उच्च शिक्षा निदेशालय के ज्वाइंट कंट्रोलर वित्त की जांच रिपोर्ट मेें कॉलेज के तीन पूर्व प्रिंसिपलों पर इस मामले की अनदेखी का आरोप भी लगाया गया है। 2016 में पूर्व प्रिंसिपलों और प्रवक्ताओं को चार्जशीट करने और सरकारी धनराशि की रिकवरी की बात कही गई थी।
लेकिन बीते दो साल तक यह फाइल बंद पड़ी रही। अब मामले में चार्जशीट हुए अधीक्षक ने शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर अन्य अफसरों को छोड़ने और सिर्फ उन्हें प्रताड़ित करने का पत्र भेजा है। पत्र मिलने के बाद शिक्षा सचिव ने मामले की फाइल देखने के बाद सरकार से इस बाबत आगामी कार्रवाई करने को लेकर मंजूरी मांगी है।
कॉलेज के तीन पूर्व प्रिंसिपलों में से एक की सेवानिवृत्ति हो चुकी है। दूसरे पूर्व प्रिंसिपल वर्तमान में शिक्षा निदेशालय और तीसरे पूर्व प्रिंसिपल हिमाचल विश्वविद्यालय में उच्च पद पर नियुक्त हैं।