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मंडी गोलीकांड: बाउंसरों के शव देख चीखों से गूंजा मंडी अस्पताल

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मजदूरों पर फायरिंग करने वाले ठेकेदार के बाउंसरों को मौत के घाट उतारने के बाद रविवार को भी मंडी में माहौल तनावपूर्ण रहा। जोनल अस्पताल पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। पांच घायल बाउंसरों का इलाज पुलिस के कड़े पहरे में किया जा रहा है। वहीं, भीड़ ने जिन चार बाउंसरों को मौत के घाट उतारा था, उनके करीब 30 परिजन व दोस्त शवों के लेने के लिए रविवार करीब 11:00 बजे अस्पताल पहुंचे। बाउंसरों के शव देख परिजन बिलख पड़े। पूरा अस्पताल चीख-पुकार से गूंज उठा। वहीं पुलिस घटनास्थल पर गहन तफ्तीश में जुटी है। पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआर दर्ज की है।
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जिला प्रशासन की ओर से एडीएम विवेक चंदेल को मामले की जांच सौंपी गई है। जोनल अस्पताल में दाखिल पंजाब के पांचों घायलों को पुलिस की निगरानी में पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि मृतक तनविंद्र सिंह उर्फ हैरी के पिता तनजीत सिंह व अन्य परिजन शव के लिए पहुंचे। पिता हाय ओ रब्बा... मेरा पुत मर गया... कहते हुए शव गृह की ओर गए। हैरी के गांव से परिजन, चचेरे भाई व अन्य शव लेने पहुंचे थे।

फूट-फूटकर रो पड़ा बाउंसर का बेस्ट फ्रेंड

समय सुबह 11 बजे, स्थान : जोनल अस्पताल मंडी का शव गृह। मृतकों के दोस्त व चचेरे भाई शव गृह के बाहर व अंदर अपने दोस्तों को देखने के लिए बेचैन थे। शव लेने के लिए दोस्तों व भाईयों ने पुलिस के पास औपचारिकताएं पूरी कीं। पोस्टमार्टम रूम में चारों के शव रखे गए थे। दोस्त व भाई बातचीत कर रहे थे।

एकाएक पुलिस ने पोस्टमार्टम रूम खोला। अंदर खून से लथपथ चारों के शव थे। एक युवक अपने मृत दोस्त के हाथ को पकड़ कर फूट-फूट कर रो पड़ा। अन्य दोस्त व भाई खून से लथपथ शवों को देखकर आपस में लिपट-लिपट कर रो पड़े। कुछ दोस्त पोस्टमार्टम रूम में शवों को देखने तक की हिम्मत न जुटा पाए और बाहर ही रोते रहे।

इमरजेंसी वार्ड में लटका रहा ताला- रविवार को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ताला लटका रहा। बिना परमिशन वार्ड में किसी की एंट्री नहीं होने दी गई। पुलिस ने दिनभर अस्पताल में बाउंसरों की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रखी। दोपहर तक अस्पताल पुलिस छावनी में तबदील रहा। युवाओं के अस्पताल से रेफर होने तक आपातकालीन वार्ड के बाहर पुलिस लाइन से करीब एक दर्जन जवान मौजूद रहे। आपातकालीन वार्ड में दाखिल होने वाले सभी रास्ते सील कर दिए गए थे।

घायल मजदूर दूसरे वार्ड में शिफ्ट

खूनी संघर्ष में घायल हुए मजदूरों को अस्पताल प्रबंधन की ओर से दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं, पोस्टमार्टम के दौरान भी शव गृह में बाहर महिला व पुरुष पुलिस जवान मौजूद रहे। गुस्साए ग्रामीणों के अस्पताल पहुंचने की आशंका को लेकर मंडी पुलिस चौकस रही। हालांकि कोई भी अप्रिय घटना पेश नहीं आई है।

पुलिस अधीक्षक मोहित चावला ने बताया कि पुलिस की ओर से क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई है। कमांद में तनावपूर्ण माहौल शांत हो गया है। उन्होंने बताया कि मजदूरों की ओर से 307 व आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। जबकि मृतकों के परिजनों की ओर से मजदूरों और यूनियन के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया।

मंडी गोलीकांड की सख्ती से होगी जांच: अग्निहोत्री

ऊना। उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मंडी में गोलीकांड की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें श्रम नियमों की सख्ती से जांच होगी। इसके लिए श्रम अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। ऊना में रविवार को मीडिया से बातचीत में अग्निहोत्री ने कहा कि वीरभद्र सरकार के ढाई साल विकास व जन कल्याण को समर्पित रहे हैं।

सरकार के ढाई साल पूरा होने के उपलक्ष्य में ऊना को राज्य स्तरीय उत्सव की मेजबानी करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि 25 जून को ऊना के इंदिरा स्टेडियम में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह में प्रदेश मंत्रिमंडल के सभी सदस्य, कांग्रेस के विधायक, निगमों व बोर्डों के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन और संगठन के नेता एक साथ शामिल होंगे। अग्निहोत्री ने कहा कि इन ढाई सालों में पूरे प्रदेश के साथ-साथ ऊना जिले को भी कई तोहफे मिले हैं।

जिले को 922.48 करोड़ लागत की देश की सबसे बड़ी तटीयकरण योजना का तोहफा मिला है। इसके तहत स्वां नदी की 390 किलोमीटर लंबी सभी 73 सहायक खड्डें चैनेलाइज हो रही हैं। इस मौके पर उनके साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र धर्माणी भी उपस्थित रहे।

मंडी गोलीकांड ने देवभूमि को किया शर्मसार: धूमल

भोरंज (हमीरपुर)। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि समाज विरोधी तत्वों पर नकेल कसने में प्रदेश सरकार नाकाम साबित हो रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पुलिस का प्रयोग अन्य कार्यों के लिए कर रहे हैं। जहां पुलिस का प्रयोग होना चाहिए, वहां पुलिस नहीं है। भोरंज में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश में कत्ल, चोरी, बलात्कार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

जिस प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है, उसे मंडी प्रकरण ने बुरी तरह शर्मसार किया है। मजदूरों को वेतन नहीं दिया गया, पीएफ उनके खातों में नहीं डाला। हथियार बंद लोगों का वहां पहुंचकर इस तरह की घटना को अंजाम देना पुलिस व प्रशासन की कमजोरी को दर्शा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्मशाला गैंगरेप का मामला मीडिया ने उठाया। उसकी जांच मुख्यमंत्री ने एसआईटी से करवाने की बजाए पहले ही इसे फर्जी करार दे दिया और राजनीतिक तौर पर बदनाम करने की बात उछाल दी।

उन्होंने कहा कि यदि गैंगरेप हुआ है तो दोषियों को सजा होनी चाहिए। यदि किसी ने षंडयंत्र रचा है तो उन्हें भी सजा होनी ही चाहिए। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ बल्कि एसपी व जिलाधीश का तबादला कर दिया गया। जिससे यह मामला संदेह के घेरे में है। इस अवसर पर उनके साथ पूर्व शिक्षा मंत्री ईश्वर दास धीमान, मंडलाध्यक्ष दलवीर ठाकुर, बीडीसी उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम लाल शर्मा, जिला अध्यक्ष बलदेव धीमान उपस्थित रहे।

मंडी खूनी संघर्ष की होगी निष्पक्ष जांच: डीजीपी

ऊना। डीजीपी संजय कुमार ने कहा कि मंडी के कमांद स्थित आईआईटी में खूनी संघर्ष मामले की पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी। इस मामले में कानून की नजर में दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति पर कार्रवाई होगी। पुलिस को इस बाबत सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। रविवार को इंदिरा स्टेडियम ऊना में कांग्रेस की 25 जून को प्रस्तावित रैली की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे डीजीपी ने कहा कि इस घटना से पूर्व सीटू से जुड़े कुछ लोग तनावपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।

इस पर ठेकेदार के सुरक्षा गार्डों ने गोलीबारी कर दी। उसके बाद मुठभेड़ में चार लोगों की मौत हुई। उन्होंने डीसी ऊना व एसपी को आगामी 25 जून को ऊना के इंदिरा स्टेडियम में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली में व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। डीजीपी ने कहा कि आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इससे किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

डीजीपी ने स्टेडियम में जाकर वहां बनाए जा रहे स्टेज और आम लोगों के प्रवेश व एंट्री को लेकर व्यवस्था का जायजा लिया। इस मौके पर डीसी ऊना अभिषेक जैन, एसपी अनुपम शर्मा, एडिशनल एसपी वीरेंद्र ठाकुर, डीएसपी अमित शर्मा, कुलविंद्र सिंह के अलावा एसएचओ सदर शेर सिंह आदि मौजूद रहे।
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प्रशासन सर्तक होता तो नहीं होती घटना-कौल सिंह

मंडी। स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने रविवार को जोनल अस्पताल पहुंच कर खूनी संघर्ष में घायलों का हालचाल पूछा। उन्होंने पंजाब के पांचों घायलों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर करने के आदेश दिए।

इस दौरान कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि अगर प्रशासन व पुलिस सतर्क होता तो मजदूरों व ठेकेदारों के लोगों के बीच यह घटना नहीं होती। मजदूर यूनियन की ओर से एक दिन पहले ही जिला प्रशासन को भी इस बारे में अवगत करवाया गया था। जिस पर प्रशासन व पुलिस को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए थी।
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