पुलिस की जांच में सामने आएगा कि इस घोटाले में सिर्फ बाबू राम शामिल था या वह किसी की छत्रछाया में इतनी रकम का गबन कर गया। प्रोस्पेक्टस बिक्री की प्रक्रिया में इसकी छपाई, बिक्री से लेकर इसकी आय को बैंक में जमा करवाने तक की प्रक्रिया में कई लोग शामिल होते हैं।
2011 से लेकर 2017 तक कैसे किसी को इसकी भनक नहीं लगी। यूनिवर्सिटी का अपना लोक ऑडिट विभाग भी है, जो हर साल ऑडिट करता है। सवाल उठता है कि एलएडी की नजर में यह एक करोड़ का घोटाला क्यों सामने नहीं आया। इन सब सवालों का जवाब पुलिस जांच में सामने आएगा।