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एसएम कटवाल ने नहीं किया सरेंडर, खत्म हो रही है डेडलाइन

Tue, 18 Oct 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
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हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड की भर्तियों में धांधली के बहुचर्चित मामले में दोषी एसएम कटवाल को मंगलवार को आत्मसमर्पण करना है। इससे पहले न्यायालय ने चारों दोषियों को 26 सितंबर तक सरेंडर करने के आदेश दिए थे, लेकिन एसएम कटवाल ने अभी सरेंडर नहीं किया है।
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मामले से जुड़े दो शिक्षकों और बोर्ड के एक सदस्य को पुलिस जेल भेज चुकी है। चयन बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन एसएम कटवाल को हमीरपुर कोर्ट ने 18 अक्तूबर तक सरेंडर करने के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक सरेंडर नहीं किया है। विजिलेंस भी दोषी का पता नहीं लगा पाई है।

बोर्ड की भर्तियों में धांधली के दोषी तत्कालीन बोर्ड सदस्य डॉ. विद्यानाथ ने 24 सितंबर को कोर्ट में सरेंडर किया था। दोषी शारीरिक शिक्षक राकेश छाबड़ा को विजिलेंस ने चंबा और टीजीटी के लिए चयनित मदन गोपाल को विजिलेंस ने ऊना से गिरफ्तार किया था।
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तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल में भेज दिया है। मामले का चौथा दोषी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर है। दोषी एसएम कटवाल को कोर्ट ने पहले 26 सितंबर तक कोर्ट में सरेंडर करने का समय दिया था। बाद में अवधि को बढ़ाकर 18 अक्तूबर कर दिया।

 लेकिन मंगलवार 18 अक्तूबर तक न तो विजिलेंस की टीमें एसएम कटवाल का सुराग लगा पाई हैं और न ही दोषी ने सरेंडर किया है। उधर, एएसपी विजिलेंस बलबीर सिंह का कहना है कि दोषी एसएम कटवाल का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। दोषी की धरपकड़ को जगह जगह छापामारी की जा रही है।
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भर्तियों में धांधली का है मामला

हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड हमीरपुर (अब हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग) में वर्ष 2001-02 में सरकारी पदों पर नियुक्तियां के दौरान गड़बड़ी के आरोप लगे थे। भाजपा सरकार के समय ये भर्तियां हुई थीं और एसएम कटवाल उस समय बोर्ड के चेयरमैन थे, जबकि डॉ. विद्यानाथ बोर्ड के सदस्य के पद पर नियुक्त थे।

वर्ष 2004 में सत्ता बदलते ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस भर्ती मामले की जांच करवाई। विजिलेंस ने मामले की जांच कर कोर्ट में चालान पेश किया। इसके बाद सेशन कोर्ट हमीरपुर ने इस मामले में चार लोगों बोर्ड के चेयरमैन एसएम कटवाल, सदस्य डॉ. विद्यानाथ, शारीरिक शिक्षक राकेश छाबड़ा और टीजीटी शिक्षक मदन गोपाल को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी।

इस फैसले को आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन जुलाई 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज करते हुए सेशन कोर्ट का फैसले को सही मानते हुए एक साल कैद की सजा बरकरार रखी।
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