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ASP, DSP ने किया महिला पुलिस कर्मियों का शारीरिक उत्पीड़न

Sun, 29 Jan 2017 05:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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महिला कांस्टेबलों से अश्लील हरकतें करने के आरोपी पुलिस अधिकारियों की जांच रिपोर्ट सरकार के पास पहुंच गई है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर महिला पुलिस अधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जांच रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। अब गृह विभाग जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बता दें, आरोपी एडिशनल एसपी और डीएसपी के खिलाफ महिला कांस्टेबलों ने शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत की थी। 
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पिछले साल अगस्त महीने में शिमला में तैनात एक एडिशनल एसपी के खिलाफ कुछ महिला कांस्टेबलों ने पुलिस मुख्यालय के अफसरों को शिकायत पत्र भेजा था। गुमनाम शिकायत पत्र में महिला कांस्टेबलों ने अफसर पर आरोप लगाया था कि वह उनके साथ शारीरिक उत्पीड़न करता है।

कार्य स्थल पर महिला कर्मचारी से शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत पर पुलिस मुख्यालय ने पहले आरोपी अफसर को पद से हटा दिया। महिला डीआईजी की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर जांच शुरू की। इस बीच, इंस्पेक्टर से प्रमोट हुए एक डीएसपी के खिलाफ भी महिला कांस्टेबल ने कार्यस्थल में शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत कर दी।
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इसकी जांच एक महिला अधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी से कराई गई। विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान दोनों अफसरों ने आरोपों से इनकार किया। लेकिन दोनों मामलों में महिला कांस्टेबलों ने आरोपी अफसरों के खिलाफ गवाही दी। सूत्रों का कहना है कि कमेटी ने दोनों अफसरों के खिलाफ कार्यस्थल पर शारीरिक उत्पीड़न के आरोप सही पाए हैं।

जांच पूरी होने पर दोनों की रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेज दी गई है। नाम न लिखने की शर्त पर गृह विभाग के अधिकारियों ने जांच फाइल मिलने की पुष्टि की है। बता दें, दोनों अफसर पहले भी चर्चा में रहे हैं। दोनों के खिलाफ महिला उत्पीड़न के अलावा ड्यूटी के दौरान गलत व्यवहार के मामलों की भी कई जांचें हुईं, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। 

क्या कहते हैं जानकार
कार्यस्थल में महिला कर्मचारी के उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए महिला अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाती है। कमेटी को देखना होता है कि शिकायत कार्यस्थल में महिला कर्मचारी के उत्पीड़न की श्रेणी में आती है या नहीं। अगर आती है तो आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध हो रहे हैं या नहीं। 

खास बात यह है कि ऐसे मामलों में कमेटी की जांच रिपोर्ट को ही अंतिम माना जाता है। विभागीय जानकार बताते हैं कि ऐसे मामलों में आरोप सिद्ध होने पर आरोपी को बर्खास्त तक किया जा सकता है। साथ ही अगर महिला अधिकारी या कर्मचारी अलग से पुलिस में शिकायत करे तो आरोपी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है।
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