सरकार के अधीन चल रहे हिमाचल के जिला कांगड़ा के इंदौरा उपमंडल के श्रीराम गोपाल मंदिर डमटाल के पैसे की अफसर बंदरबांट में लगे हैं। पहले से ही वित्तीय अनियमितताओं में घिरे श्रीराम गोपाल मंदिर में करोड़ों के घोटाले की बू आ रही है। इसका खुलासा हाल ही में सेवानिवृत्त हुए मंदिर अधिकारी ने अपने कार्यकाल के दौरान डीसी को लिखे पत्र में किया है।
उन्होंने श्रीराम गोपाल मंदिर में 15 मार्च, 2015 से 31 मार्च, 2017 तक पद पर रहे पूर्व मंदिर अधिकारी पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। डीसी को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि पूर्व मंदिर अधिकारी ने मंदिर परिसर में बनी दुकानों का किराया कौड़ियों के भाव में लिया। मंदिर परिसर में कुल 72 दुकानें हैं।
एक दुकान के परिसर में पार्किंग और बड़े गोदाम तक हैं। आरोप है कि पूर्व मंदिर अधिकारी ने लीज नियमों के विपरीत जाकर एक दुकान का सालाना किराया महज 2 हजार रुपये लिया। और तो और दुकानदारों से पिछले 12 साल का किराया एकमुश्त लिया गया। यानी, एक दुकान का किराया महीने का नहीं, साल का नहीं बल्कि पिछले 12 साल का एकमुश्त मात्र 24 हजार रुपये लिया गया।
ऐसे में 72 दुकानों का 12 साल का एकमुश्त किराया पूर्व मंदिर अधिकारी ने कौड़ियों के भाव ले लिया। पत्र में डीसी से पूर्व मंदिर अधिकारी के खिलाफ जांच कराने की मांग की गई है।
डीसी कांगड़ा सीपी वर्मा ने पूर्व मंदिर अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर एसडीएम नूरपुर से जांच रिपोर्ट मांगी है। बताया जा रहा है कि करोड़ों में बनने वाला किराया महज कुछ लाख रुपये में सिमट कर रह गया। इससे सरकार को करोड़ों की चपत लगी है।
लेटर बम के बाद उठ रहे ये सवाल
- आखिर 12 वर्ष तक मंदिर परिसर की दुकानों का किराया मंदिर प्रशासन ने दुकानदारों से क्यों नहीं लिया। 12 वर्ष बाद ही किराये की याद क्यों आई।
- 12 वर्ष बाद अगर किराया लेने की याद आई तो दुकानदारों के एग्रीमेंट को डीसी कांगड़ा के ध्यान में लाकर संशोधित क्यों नहीं किया गया।
- 12 वर्ष पुराने सालाना 2 हजार रुपये के किराये वाले एग्रीमेंट को उसी तर्ज पर पूर्व मंदिर अधिकारी ने नियमों के विपरीत जाकर किस मंशा से अपने स्तर पर किस अधिकार से तय कर दिया।
- 12 साल तक मंदिर की दुकानों के कम किराये पर एसडीएम की नजर क्यों नहीं पड़ी
डीसी सीपी वर्मा ने कहा कि शिकायत पर उन्होंने संज्ञान लेकर एसडीएम कांगड़ा से रिपोर्ट मांगी है। पूर्व मंदिर अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। दोषी पाए जाने पर अफसर पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी।