प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद लंबे समय से कोर्ट में पेश न होने वाले आरोपी को तुरंत जेल भेजने के आदेश पारित हुए हैं। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी ने आरोपी जितेंद्र कुमार को जेल भेजने के आदेश पारित किए। आरोपी की ओर से न्यायालय को बताया गया था कि उसे इस बाबत जानकारी नहीं थी कि राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष अपील दायर की गई है।
न्यायालय ने यह पाया कि जानबूझकर वह व्यक्ति हाईकोर्ट के समक्ष हाजिर नहीं हो रहा था। एक वर्ष से पुलिस उसके स्थानीय पते पर उसे ढूंढने में लगी रही, लेकिन हर बार उसके माता-पिता व रिश्तेदारों ने यह कहा कि वह अब यहां नहीं रहता है। हमें नहीं पता, वह कहां रह रहा है। न्यायालय ने पाया कि उसने जानबूझकर हाईकोर्ट द्वारा भेजे गए वारंट को नहीं लिया।
वह कोर्ट के समक्ष जानबूझ कर पेश नहीं हुआ। इस कारण उसे भगोड़ा घोषित करना पड़ा। न्यायालय ने हाईकोर्ट में तैनात पुलिस को निर्देश दिए कि उसे हिरासत में लिया जाए और पुलिस स्टेशन सदर के पुलिस प्रभारी के सुपुर्द किया जाए। पुलिस प्रभारी सदर शिमला को आदेश दिए गए कि उसे सब जेल कैथू जेल भेजा जाए।
भांग की खेती को कानूनी मान्यता देने के मामले में सुनवाई टली
प्रदेश हाईकोर्ट में चल रहे भांग की खेती को कानूनी मान्यता प्रदान करने के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के जवाब दायर न करने पर मामले पर सुनवाई 21 मई तक के लिए टल गई। प्रदेश हाईकोर्ट ने 8 जनवरी को पारित आदेशों में केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर इस मामले अपना रुख स्पष्ट करने के आदेश दिए थे।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने दोनों सरकारों को अपना जवाब देने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने याचिका दायर कर इन पदार्थों की खेती पर लगाई गई रोक को हटाकर इसे कानूनी मान्यता देने की गुहार लगाई है।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद प्रदेश सरकार के वन व स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, बायो डायवर्सिटी विभाग के निदेशक व केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को प्रतिवादी बनाते हुए 4 सप्ताह में जवाब तलब किया था। प्रार्थी का कहना है कि दवाई के लिए उपयोग की दृष्टि से ग्रामीण क्षेत्रों में भांग की खेती को कानूनी मान्यता प्रदान करके किसानों की आर्थिक हालत व युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या से निदान पाया जा सकता है।
साथ ही कहा था कि भांग के पौधों को जलाने से होने वाली पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को भी खत्म किया जा सकता है। जनहित के दृष्टिगत यह जरूरी हो जाता है कि इस पदार्थ का दवाइयों के लिए प्रयोग किया जाए और नेशनल फाइबर पॉलिसी 2010 के अंतर्गत लाया जाए।
3 अप्रैल के लिए टली बद्दी के उद्योगों के मामले की सुनवाई
प्रदेश हाईकोर्ट में बद्दी में स्थापित उद्योगों द्वारा प्रदूषण फैलाने की शिकायत को लेकर चल रहे मामले में सुनवाई 3 अप्रैल के लिए टल गई है। सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यह मामला उच्चतम स्तर पर उठाया जाएगा, ताकि पर्यावरण कानूनों की अनुपालना तय की जा सके।
सरकार ने आश्वासन दिया कि प्रदेश में पर्यावरण को अमलीजामा पहनाने के लिए कारगर तंत्र विकसित करने के लिए ऊंचे स्तर पर निर्णय लिए जाएंगे। पिछली सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कहा था कि प्रदेश में पर्यावरण प्रदूषण से निपटने के लिए डिफॉल्टर उद्योगों की बिजली-पानी काटना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मजबूत, कारगर, व निष्पक्ष तंत्र विकसित करना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने दीं पदोन्नतियां
हाईकोर्ट ने अधीक्षक ग्रेड टू विजय कुमार शर्मा और कली राम को पदोन्नत कर अनुभाग अधिकारी बनाया है। लाइब्रेरियन महिमा शर्मा, वरिष्ठ सहायक देवी चंद ठाकुर व हेम सिंह को अधीक्षक ग्रेड टू, कनिष्ठ सहायक विवेक शर्मा व सोनिया जसवाल को वरिष्ठ सहायक और सहायक लाइब्रेरियन हेमलता शर्मा को लाइब्रेरियन बनाया गया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।