प्रसव के समय अगर मैं अस्पताल में होता तो नन्हीं बिटिया की जान नहीं जाती। कभी ऐसा अपराध नहीं होने देता। हमारे मजहब में बेटी का बहुत ऊंचा स्थान है। जो भी हुआ, वो गलत हुआ है।
हिमाचल के सिविल अस्पताल आनी में नवजात हत्याकांड मामले में यह बात बच्ची के दादा वसीम अहमद ने अमर उजाला से कही। नवजात की मौत की खबर सुनकर करसोग के नांज निवासी वसीम का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्ची की दादी और नानी ने पैदा होते ही उसकी हत्या कर दी थी।
कहते हैं कि उन्हें बिलकुल भी पता नहीं था कि उनकी पीठ के पीछे ये सब हो गया है। जब घटना के बारे में पता चला तो पैरों तले जमीन खिसक गई। उधर, मामले में नवजात शिशु की नानी और दादी पुलिस गिरफ्त में हैं।
पुलिस के सामने दादा ने दिया चौंकाने वाला बयान
यह खबर सुनकर रिश्तेदार भी सदमे में हैं। वसीम अहमद ने इस घटना को अनपढ़ता और नासमझी करार दिया। कहा कि वे अस्पताल में मौजूद होते तो ऐसा कभी नहीं होने देते। उन्होंने कहा कि उन्हें तो यह भी पता नहीं था कि उनकी बहू गर्भवती है।
कहा कि गत 25 मार्च को उनकी बहू ने दस्त और पेट दर्द की बात कही। इस पर उन्हें अस्पताल भेजा गया। जब डॉक्टर ने बताया कि उनकी बहू गर्भवती है तो वे सभी हैरान रह गए। वसीम ने अपनी पत्नी का भी बचाव किया और कहा कि वह इस हत्या में संलिप्त नहीं है।
बता दें, सिविल अस्पताल आनी में जन्म के तीन घंटे बाद ही दादी और नानी ने बेरहमी से गला घोंटकर बच्ची की हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने दोनों आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है। उधर, इस घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।
क्षेत्र के लोगों ने भी घटना पर कड़ा रोष जताया। लोग इस बात पर हैरान हैं कि कोई कैसे नन्हीं सी जान को मौत के घाट उतार सकता है। पुलिस इस मामले की गहनता से छानबीन में जुटी है।