संस्था के प्रेस सचिव रणजीत सिंह गोस्वामी ने कहा कि मोहाली के साथ लगते गांव दाऊं माजरा और सहोड़ा में पंजाब का पेरिफेरी एक्ट लागू है। यहां कॉलोनी का निर्माण नहीं हो सकता। कुछ बिल्डरों ने स्थानीय प्रशासन से मिलकर हिमाचल के लोगों को 70 एकड़ जमीन पर प्लॉट बेच दिए।
लगभग डेढ़ हजार हिमाचल वासियों से करीब 100 करोड़ की ठगी सामने आई है। संस्था ने जब आवाज उठाई तो गमाडा (ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) ने इसका संज्ञान लेकर दस लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, लेकिन मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई है। उन्होंने बताया कि हिमाचल के लोग बिल्डरों के लुभावने विज्ञापनों के झांसे में आ रहे हैं। संस्था ने अपील की है कि लोग इस तरह के झांसे में न आएं और पूरी तरह जांच परख के बाद ही जमीन खरीदें।
उनके साथ रणजीत सिंह, अजमेर सिंह और सुमित भी मौजूद रहे। मामले में मोहाली स्थित गमाडा के प्रशासक रवि भगत का कहना है कि जहां कॉलोनियां काटी जा रही हैं, वहां बिल्डर्स के पास इसके लाइसेंस नहीं हैं। इस बाबत विभाग की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है।