फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत के मामले में पुलिस के सुर बदल गए हैं। प्रथम दृष्टया हत्या का मामला बताने वाली हिमाचल पुलिस ने अब दावा किया है कि मंडी के सेरी कतांडा जंगल में युवा फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह जहर खाने के बाद पेड़ से उल्टा लटक गया। होशियार की डायरी में लिखे नोट और पोस्टमार्टम में कीटनाशक के अंश मिलने का बेतुका तर्क देते हुए पुलिस ने इस केस को अब हत्या से आत्महत्या में बदल दिया है।
पुलिस की इस थ्योरी पर कई सवाल उठ रहे हैं। परिजन भी पुलिस की थ्योरी मानने को तैयार नहीं है। इस केस में बीते दिन बीओ समेत गिरफ्तार किए पांचों आरोपियों के खिलाफ अब फॉरेस्ट गार्ड को आत्महत्या के लिए उकसाने का केस बना दिया है। हालांकि, जंगल में पेड़ से लाश लटकने के सवाल पर पुलिस के पास अभी कोई जवाब नहीं है।
15 से 20 फीट ऊंचाई पर पेड़ से कैसे लटका
प्रश्न यह है कि अगर जहर का सेवन करके होशियार ने आत्महत्या की है तो उसका शव 15 से 20 फीट ऊंचाई पर पेड़ से कैसे लटका? चिकित्सकों की मानें तो जहर खाकर कोई भी आदमी पेड़ पर चढ़ नहीं सकता। और अगर पेड़ पर चढ़कर जहर खाया तो उसकी शीशी बैग में कैसे रखेगा।
पुलिस अब कह रही है कि कलाइयां कटी नहीं हैं जबकि परिजनों का कहना है कि मृतक की कलाइयों पर खून जमने और चोटों के निशान थे। कोहनी से आगे हाथों तक काफी सूजन थी।
होशियार सिंह के चाचा परस राम का कहना है कि मृतक की दोनों बाजू पर रस्सियों के बांधने और सिर पर चोट के निशान थे। उनके अनुसार अगर जहर की बात सामने आ रही है तो उसे कोई खिला भी सकता है।
यह लिखा है डायरी में
एसपी मंडी प्रेम कुमार ठाकुर का कहना है कि पहले धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मृतक के लिखित दो सुसाइड नोट के आधार अब धारा 306 लगाई गई है।
जांच में और तथ्य सामने आने के बाद इन धाराओं को फिर से बदला जा सकता है। लिखावट के नमूने फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिए गए हैं। नोट के आधार पर बीओ समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
एसपी के अनुसार होशियार ने डायरी में अपना लंबित वेतन दादी को देने के लिए लिखा है। यह भी लिखा है कि वेतन से उसके चाचा परस राम को भी पैसे लौटाए जाएं। शिमला में उसके मित्र धीरज कुमार के पैसे भी लंबित वेतन से दे दिए जाएं। नोट में यह भी लिखा है कि ईमानदारी से काम करना मुश्किल है। चारों लोग मुझे ईमानदारी से काम करने से रोकते हैं।