शिमला में पंजाब तथा हरियाणा की तरह कामर्शियल वाहनों में रिफ्लेक्टर स्टीकर लगाने के नाम पर वसूली का मामला सामने आया है। एक शख्स मोटर व्हीकल नियम का हवाला देकर कामर्शियल वाहनों को जबरन रोककर उनमें स्टीकर चिपका रहा था।
रिफ्लेक्टर स्टीकर के नाम पर बड़ी गाड़ियों से 200 रुपये और छोटी गाड़ियों से 100 रुपये की वसूली भी की जा रही थी। रिफ्लेक्टर स्टीकर लगाने के नाम पर इस तरह की लूट का मामला पुलिस के उच्चाधिकारियों के पास पहुंचा।
पुलिस के अधिकारी ने तुरंत इस मामले में रिफ्लेक्टर स्टीकर लगाने वाले एक ठेकेदार को तलब कर ऐसा करने पर रोक लगा दी। शुरूआती जांच में सामने आया कि उक्त व्यक्ति करीब पांच तथा दस रुपये के चार-चार स्टीकर कामर्शियल वाहनों में लगा रहा था।
लेकिन वह व्यक्ति बिना किसी अनुमति के वाहनों से रिफ्लेक्टर स्टीकर लगाने के नाम पर 100 और 200 रुपये की वसूली कर रहा था। जबकि मोटर व्हीकल नियमों के मुताबिक जबरन किसी भी गाड़ी में स्टीकर लगाने का कोई प्रावधान नहीं है।
कामर्शियल वाहनों में स्टीकर जबरन लगाने का इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आने पर जब इसकी पुलिस के अधिकारी ने जांच की तो पता चला कि उस व्यक्ति ने पहले भी सोलन में गाड़ियों में स्टीकर लगाए थे।
पुलिस ने व्यक्ति को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। एसएपी अधीक्षक भजन देव नेगी का कहना है कि कामर्शियल वाहनों में जबरन स्टीकर लगाने का मामला सामने आया है। इस पर रोक लगा दी गई है।