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फर्जी फर्में बनाकर कर डाला 6 करोड़ का फर्जीवाड़ा

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आबकारी एवं कराधान उड़नदस्ते ने दक्षिण क्षेत्र परवाणू (सोलन) में फर्जी फर्में बनाकर 6 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का फर्जीवाड़ा पकड़ा है। इसमें सोलन और कालाअंब सिरमौर की तीन फर्मों के नाम सामने आ रहे हैं। विभाग ने कार्रवाई करते हुए 1.7 करोड़ टैक्स और जुर्माने के नोटिस कंपनियों को थमा दिए हैं। यह गड़बड़ी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के दौरान अधिकारियों की नजर में आई है।
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विभाग का तर्क है कि ऐसे कुछ अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं। जिसके चलते विभाग सिरमौर और सोलन में सर्वे तेज करेगा। तीनों फर्मों के अपने उद्योग हैं और वह इलेक्ट्रोनिक उत्पादों में डील करती हैं। इसकी पुष्टि उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त डा सुनील कुमार ने की है। उन्होंने कहा कि इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने में ईटीओ प्रदीप शर्मा की विशेष भूमिका रही है जिन्हें ईटीआई अमित कश्यप ने असिस्ट किया है।
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ऐसे अंजाम दिया पूरा फर्जीवाड़ा

तीनों फर्मों ने आईटीसी के नाम पर धोखाधड़ी की है। इन फर्मों ने यह लाभ लेने के लिए फर्जी फर्में बना डाली और करीब 6 करोड़ की खरीद इन्हीं से दर्शा दी। जिसके बाद विभाग ने इस वर्ग में लाभ लेने के लिए अप्लाई कर दिया लेकिन विभाग से यह बच नहीं सके। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में फर्जी खरीद को लेकर अनियमितता सामने आ गई।

यह है इनपुट टैक्स क्रेडिट
प्रदेश के भीतर कच्चा माल खरीदने वाले उद्योगों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलता है। जिस मद का कच्चा माल उद्योग खरीदता है, यह लाभ उसी के अनुरूप दिया जाता है। मान लें अगर किसी ने चार फीसदी या 13.75 फीसदी टैक्स वाले सामान की खरीद की है, उसे उसी मद के मुताबिक लाभ मिलेगा। बशर्ते वह हिमाचल के ही उद्योग से खरीदा हो। सालाना टैक्स अदायगी में यह छूट दी जाती है।

इससे पहले भी पकड़े हैं मामले
आबकारी एवं कराधान विभाग के इसी फ्लाइंग स्क्वायड ने पहले भी आईटीसी का फर्जीवाड़ा पकड़ा है। बद्दी में एक मामले में विभाग ने संबंधित फर्म के मालिक पर एफआईआर भी दर्ज करवाई है। इसके अलावा परवाणू में इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
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