गाड़ियों से लाल और नीली बत्ती उतारने के बाद कई अफसर अब तक सदमे से उभर नहीं पा रहे हैं। दिल पर पत्थर रख कर गाड़ी से बत्ती तो उतरा दी लेकिन मन आज भी कहीं न कहीं खुद को वीआईपी दिखाने को बेकाबू हो ही जाता है। सोमवार को उतर प्रदेश सहारनपुर के डिविजनल कमिश्नर इनोवा गाड़ी में झंडी लगाकर शिमला के प्रतिबंधित सड़क पर बिना रोड परमिट के ही दनदनाते पहुंच गए।
गाड़ी के आगे झंडी को फड़फड़ता देख सिपाही की हिम्मत उसे रोकने की नहीं हुई लेकिन स्मार्ट पुलिस के आला अफसर की निगाहों से यूपी नंबर की यह गाड़ी नहीं बच पाई। अफसर ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस वालों को गाड़ी से तत्काल झंडी उतरवाने और प्रतिबंधित सड़क पर बिना परमिट के आने पर चालान करने के निर्देश दिए।
इससे पहले की पुलिस गाड़ी वालों को यातायात नियमों के उल्लघंन के बारे में जानकारी दे पाती , ड्राइवर गाड़ी को भगा ले गया। यह देख गाड़ी की धरपकड़ करने की लॉग दे दी गई और कुछ ही देर में गाड़ी को ढूंढ निकाला और नियमों के तहत कार्रवाई कर चालान कर दिया गया।
रोकने पर गाड़ी को भगा ले गया चालक, गाड़ी से झंडी भी उतरवाई
पुलिस के मुताबिक, गाड़ी में उतर प्रदेश, सहारनपुर के डिविजनल कमिश्नर एमपी अग्रवाल बैठे हुए थे। प्रतिबंधित सड़क सीटीओ चौक पर गाड़ी झंडी लगाकर पहुंची थी। गाड़ी का चालान राकेश यादव के नाम से काटा गया है। यह इनोवा गाड़ी यूपी नंबर 19 बी-0009 है। इस गाड़ी में डिविजनल कमिश्नर की झंडी लगी हुई थी।
झंडी लगी गाड़ी को सीटीओ चौक पर घूमता देख एएसपी भजन देव नेगी ने मौके पर मौजूद पुलिस कर्मचारियों को चैक करने के लिए कहा। जब ड्यूटी पर मौजूद ट्रैफिक कांस्टेबल चालक से बात करने लगा तो वह वहां से ड्राइवर गाड़ी भगा ले गया। लेकिन कुछ दूरी पर गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस ने रोक लिया और नियमों के उल्लंघन पर अलग अलग धाराओं में 2200 रुपये का चालान कर दिया।
इसमें 1500 का चालान बिना रूट परमिट के प्रतिबंधित सड़क पर आने पर किया गया। दूसरा चालान गाड़ी पर लगी झंडी का किया गया इस झंडी के लिए डिविजनल कमिश्नर सहारनपुर शिमला के लिए अधिकृत नहीं हैं। इसी तरह तीसरी धारा गाड़ी को मौके से भगा ले जाने की लगाई गई इसमें 500 का चालान किया गया है।
22 सौ का चालान, झंडी भी उतारी: नेगी
एएसपी भजन देव नेगी ने बताया कि यह सहारनपुर के डिविजनल कमिश्नर की गाड़ी थी। यह गाड़ी बिना रोड परमिट के सीटीओ चौक पर थी और इसमें झंडी भी लगी हुई थी।
संबंधित अफसर इस झंडी को यहां लगाने के लिए अधिकृत नहीं थे। जब मौके पर मौजूद कांस्टेबल ने ड्राइवर से बात करनी चाही तो वह गाड़ी भगा ले गया। कुछ देर में गाड़ी ट्रे्स हो गई और 2200 का चालान किया गया और गाड़ी से झंडी भी उतरवा दी गई।