एचपीसीए केस में विजिलेंस की चार्जशीट बेशक तैयार हो, लेकिन इसमें आरोपी बनाए गए आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
कार्मिक विभाग ने आईएएस अधिकारी दीपक सानन के खिलाफ केस केंद्र सरकार को भेजने के लिए विजिलेंस से कुछ दस्तावेज मांगे हैं। यही प्रक्रिया दूसरी एफआईआर में आरोपी बनाए गए आईएएस केके पंत के केस में अपनानी होगी।
दरअसल, भारत सरकार को केस भेजने का एक फार्मेट है। इसके आधार पर ही केस भेजा जाता है। इसे भेजने के लिए अफसरों पर लगाए गए आरोपों को प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज भी साथ भेजने होते हैं। ये दस्तावेज जांच एजेंसी देती है।
इसलिए धर्मशाला विजिलेंस से जानकारी मांगी गई है। इसके बाद ही केस दिल्ली भेजा जाएगा। इसके लिए धर्मशाला विजिलेंस ऑफिस से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं। भारत सरकार सामान्यतया 3 महीने के भीतर अभियोजन मंजूरी पर फैसला देती है।
तीसरे मामले की जांच अंतिम चरण में
विजिलेंस ने एचपीसीए पर जो तीसरी एफआईआर दर्ज की है, उसकी जांच अंतिम चरण में है। एचपीसीए पर होटल पवेलियन बनाने के लिए हजारों की संख्या में पेड़ काटने के आरोप लगाए गए थे।
मामले में तत्कालीन वन मंडल अधिकारी, रेंज ऑफिसर सहित राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारी शामिल हैं।