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भ्रूण लिंग जांच मामला: अल्ट्रासाउंड के लिए अधिकृत नहीं था डॉक्टर

Tue, 06 Feb 2018 11:08 AM IST
नीरज महाजन, अमर उजाला, बिलासपुर / भराड़ी
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घुमारवीं में लिंग जांच करने के आरोप में पुलिस के स्टिंग ऑपरेशन के दौरान धरा गया डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करने के लिए अधिकृत ही नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करने के लिए अधिकृत नहीं था तो क्लीनिक कैसे चल रहा था?

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स्वास्थ्य विभाग और सीएमओ ने पहले इसका निरीक्षण क्यों नहीं किया? क्या ऑफिस में बैठकर ही अल्ट्रासाउंड केंद्रों की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाती रही? सूत्र बताते हैं कि जिस डॉक्टर को लिंग जांच करते हुए पुलिस ने पकड़ा है, वह बीएएमएस है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियोलॉजिस्ट या गायनीकलोजॉलिस्ट ही अधिकृत होता है। 

विभागीय जानकारी के अनुसार अगर किसी व्यक्ति ने अपने अल्ट्रासाउंड केंद्र में कोई अधिकृत व्यक्ति रखा है तो इसकी भी जानकारी विभाग को देनी होती है। अगर कोई रेडियोलॉजिस्ट या गायनीकोलॉजिस्ट किसी के पास अल्ट्रासाउंड करने का काम करता हो और बाद में काम छोड़ देता हो तो इसके बारे में भी विभाग को अवगत करवाना जरूरी होता है। 

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48 घंटे बाद भी आरोपी का नाम नहीं जानता विभाग

सीएमओ बिलासपुर वीके चौधरी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है। उन्हें यह मालूम नहीं है कि एफआईआर में किसका नाम दर्ज है। हैरत यह है कि मामले को तीन दिन हो गए, लेकिन जिस सीएमओ के पास जांच की जिम्मेवारी है, उसे यह भी पता नहीं कि एफआईआर किसके नाम कटी है।

उन्होंने कहा कि अल्ट्रासाउंड करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट या गायनीकोलॉजिस्ट ही अधिकृत है। बीएमएस डॉक्टर अल्ट्रासाउंड नहीं कर सकता है। इसकी जांच की जा रही है। जो भी रिपोर्ट होगी वह पुलिस को दी जाएगी। 

मामले को उजागर करने वाली डीएसपी हमीरपुर रेणु शर्मा ने बताया कि मामले की जांच जारी है। जो व्यक्ति अल्ट्रासाउंड करते हुए पकड़ा गया है, वह कोई भी ऐसी डिग्री या कोई परमिशन नहीं दिखा पाया है, जिससे वह अल्ट्रासाउंड के लिए अधिकृत हो। मामले की जांच जारी है।
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