इनमें चंबा के अलावा सोलन और शिमला के बाहरी इलाकों में कई संपत्तियां शामिल हैं। गंभीर आरोपों वाली शिकायत पर सीबीआई ने जांच शुरू की तो कुछ आरोप सही निकले।
इसके बाद सीबीआई ने हाल ही में प्रदेश सरकार व प्रदेश पुलिस से उनकी नियुक्ति व वेतन संबंधी जानकारी मांगी। सूत्रों की मानें तो आईजी के वेतन और संपत्तियों के मिलान में आय से अधिक संपत्ति होने की बात सामने आई है।
इस बीच जांच शुरू होते ही आईजी ने लंबी छुट्टी लेकर दिल्ली में डटे हुए हैं। हालांकि, सीबीआई की जांच अब भी जारी है और इस महीने के अंत तक मामले में एफआईआर दर्ज होने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पुलिस हिरासत में हुए सूरज हत्याकांड में आरोपी आईजी जहूर हैदर जैदी की ओर से दायर जमानत याचिका की सुनवाई 12 जनवरी तक टल गई है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ के सामने इस मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अपना जवाब दायर किया।
बहुचर्चित गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में 19 जुलाई 2017 को आरोपी सूरज की पुलिस लॉकअप में मौत हो गई थी। इसके बाद सीबीआई ने इस प्रकरण में एफ आईआर दर्ज की थी।
इसके चलते जैदी सहित अन्य आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। इस प्रकरण में सीबीआई कोर्ट में चालान पेश कर दिया गया है। इस मामले पर सुनवाई 12 जनवरी को होगी।
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आय से अधिक संपत्ति और मनी लांड्रिंग मामले में आरोपी एलआईसी एजेंट आनंद सिंह चौहान को विशेष अदालत ने मंगलवार को जमानत प्रदान कर दी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चौहान पर लगे आरोपों को गंभीर बताते हुए जमानत याचिका खारिज करने की मांग की थी।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज संतोष स्नेही मान ने आनंद चौहान को 50 हजार के निजी मुचलके व इतनी ही राशि के दो जमानती की शर्त पर जमानत दी है। अदालत ने चौहान को गवाहों को प्रभावित न करने और बिना अनुमति विदेश नहीं जाने की हिदायत भी दी है।
याचिका में कहा गया था कि आरोपी एक साल से ज्यादा समय से हिरासत में है। उससे पूछताछ पूरी हो चुकी है और उसे हिरासत में रखने का अब कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने उसे अंतरिम जमानत दी, जिसके बाद उसने सरेंडर कर दिया।
दूसरी ओर, जांच एजेंसी ने कहा कि चौहान पर गंभीर आरोप हैं। अगर जमानत दी जाती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। प्रवर्तन निदेशालय ने चौहान को चंडीगढ़ से आठ जुलाई 2016 को गिरफ्तार किया था।
ईडी ने इस मामले में चौहान के खिलाफ छह सितंबर 2016 को आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपों पर 18 जनवरी को बहस होगी। एजेंसी का आरोप है कि चौहान ने वीरभद्र सिंह से करीब 5.14 करोड़ रुपये कैश लिया और पंजाब नेशनल बैंक के खाते में जमा कराया।
इसके बाद वीरभद्र व उनके परिजनों के नाम पर बीमा पॉलिसी खरीदकर निवेश कर दिया। बैंक खाते में मोटी रकम जमा होने के कारण वह आयकर विभाग की नजर में आ गया।