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ब्रैकल मामले में नौ साल बाद हुआ एफआरआर दर्ज करने का फैसला

Wed, 07 Aug 2019 01:44 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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बहुचर्चित ब्रैकल मामले में एफआईआर दर्ज कर स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है। ब्यूरो की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट (एसआईयू) को मामले की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन एफआईआर से इतर एक नई जानकारी सामने आई है। पुख्ता सूत्रों के अनुसार ब्रैकल कारपोरेशन के फर्जीवाड़े की शिकायत साल 2008 में भाजपा की चार्जशीट में शामिल थी और उसकी जांच उस समय विजिलेंस ब्यूरो ने शुरू की थी।

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चूंकि ब्यूरो को किसी भी मामले में अभियोग पंजीकृत करने के लिए प्रदेश सरकार से मंजूरी लेनी होती थी। इसलिए दो साल में जांच पूरी कर 2010 में ब्यूरो ने मामले में कंपनी के खिलाफ फर्जीवाड़ा करने की एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश कर दी। इसके बाद कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का फैसला लेने में सरकार को नौ साल का समय लग गया।

खास बात यह है कि जांच तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने शुरू कराई लेकिन एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकी। यही नहीं, वीरभद्र सरकार ने भी पांच साल तक मामले में एफआईआर दर्ज करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया और जांच की फाइल धूल फांकती रह गई।
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हालांकि, इस दौरान ब्रैकल कंपनी की ओर से कई बार अपफ्रंट प्रीमियम वापस करने की गुहार लगाई गई। कंपनी ने कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया और सरकार ने हर बार प्रीमियम न लौटाने का फैसला लेते हुए कंपनी की हर दरख्वास्त को खारिज कर दिया। लेकिन एक बार भी सरकार ने उस इन्क्वायरी रिपोर्ट पर फैसला लेना उचित नहीं समझा।

जयराम सरकार के सामने भी ब्रैकल ने कोर्ट के जरिये प्रीमियम लौटाने की गुजारिश की लेकिन इस बार सरकार ने न सिर्फ प्रीमियम न लौटाने का फैसला लिया बल्कि कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए। अब जांच को जल्द पूरा करने के लिए ब्यूरो ने एसआईयू को जांच सौंपी है। ऐसे में अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सरकार से धोखाधड़ी करने वालों पर कार्रवाई होगी।

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