कंडक्टर भर्ती मामले में शिमला पुलिस की याचिका सोमवार को अदालत ने खारिज कर दी है। शिमला पुलिस ने जिला अदालत से आग्रह किया था कि यह मामला पूरे राज्य से जुड़ा हुआ है। यह मामला प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट का है और इसे इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी जांच नहीं कर सकता।
लिहाजा इस मामले को दूसरी जांच एजेंसी विजिलेंस को सौंप दिया जाए। अदालत ने शिमला पुलिस की यह दरख्वास्त खारिज कर दी है। एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि अदालत के फैसले की प्रति मिलने के बाद ही इस मामले में वह कोई टिप्पणी कर पाएंगे।
अदालत ने शिमला पुलिस को साल 2003-04 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हिमाचल पथ परिवहन निगम में हुई 378 ट्रांसपोर्ट मल्टीपर्पज असिस्टेंट (कंडक्टर) की भर्ती में तत्कालीन एमडी समेत पांच अधिकारियों पर मुकदमा करने के आदेश दिए हैं।
यह आदेश जिला एवं सत्र न्यायालय की सह न्यायिक दंडाधिकारी नेहा शर्मा की कोर्ट ने दिए हैं। आरोप है कि कंडक्टर भर्ती के चार साल बाद कथित गड़बड़ी की शिकायत तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में 2007 में हुई।
भाजपा सरकार ने शाहपुर निवासी अजय कुमार की शिकायत पर विजिलेंस जांच कराई जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। हालांकि, जांच पूरी होने के बावजूद सरकार ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश नहीं दिए। 2012 में कांग्रेस फिर सत्ता में आई और उसने भी विजिलेंस जांच को दरकिनार कर दिया।
विजिलेंस जांच में ये हुए थे खुलासे
विजिलेंस जांच में पता चला कि भर्ती के लिए निगम ने विज्ञापन तो 300 पदों के लिए किया लेकिन चयन 378 का कर लिया। अकेले धर्मशाला डिवीजन से ही 147 कंडक्टर चयनित किए गए। इनमें भी तत्कालीन परिवहन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र नगरोटा बगवां से 73 और रोहड़ू से 35 लोग चयन सूची में थे। भर्ती में डिविजन स्तर पर कोई भी मेरिट नहीं बनी। भर्ती के दस्तावेजों में जमकर कटिंग और ओवर राइटिंग की गई थी।
इनके खिलाफ हुए मुकदमा दर्ज करने के आदेश
कोर्ट के आदेश में एचआरटीसी के तत्कालीन एमडी दलजीत सिंह डोगरा, तत्कालीन डीएम धर्मशाला व वर्तमान में जीएम आईएसबीटी कश्मीरी गेट एचके गुप्ता, तत्कालीन डीएम हमीरपुर एसपी चटर्जी, डीएम शिमला एमडी शर्मा और तत्कालीन डिविजनल मैनेजर (एडमिनिस्ट्रेशन) आरसी नेगी को एफआईआर में नामजद करने को कहा गया।