विश्वविद्यालय के बिपाशा कन्या छात्रावास में अज्ञात युवक के तीसरे फ्लोर में घुसने की घटना के लिए कहीं न कहीं विवि के छात्रावास की सुरक्षा में खामियां ही जिम्मेदार हैं। असल में पुराने एबी और अब बिपाशा छात्रावास के नाम से जाने जाने वाले छात्रावास परिसर में घुसने के लिए कई चोर रास्ते हैं। घटना के तुरंत बाद बुधवार को जरूर विवि की के निर्माण विंग के रिपेयर एंड मेंटेनेस डिविजन ने अपने कर्मचारियों को भेज कर इन रास्तों को बंद करने के लिए कार्य करवाया।
बुधवार को डिविजन के आधा दर्जन कर्मी चादरों और लकड़ी से इन संभावित रास्तों को बंद करने के कार्य में लगे हुए थे। छात्रावास परिसर के बाहर यूं तो लाखों की राशि खर्च कर करीब 12 से 15 फुट की दीवार चादरें और लोहे के एंगल के साथ लगाई गई हैं। जिसमें ऊपरी हिस्सों को नोकदार बनाया गया है। जिससे किसी के भी अंदर दाखिल होने की संभावना कम है, मगर इस ए ब्लॉक के पास लगी चार दिवारी में एक आदमी के गुजरने के लिए बड़ा छेद पाया गया है। जिसमें से कोई भी अंदर दाखिल हो सकता है।
इन रास्तों को बंद करने के लिए एचपीयू ने भेजे कर्मचारी
छात्रावास के मुख्य गेट पर ताला सात बजे से पहले जरूर लगता है, मगर इसके साथ से दीवार पर लगाई गई कांटेदार तारों को हटा हुआ पाया गया। जहां से कोई भी परिसर में घुस सकता है। विवि के निर्माण विंग ने चार दिवारी पर लाखों का बजट खर्च किया, मगर छात्रावास बनने के समय से हुई कांटेदार फें सिंग को आज तक मरम्मत करने की जहमत नहीं उठाई।
अज्ञात युवक परिसर में कैसे आया और उसके बाद वह एक छत से दूसरी छत पार कर ए ब्लॉक के तीसरे फ्लोर की खिड़की तक पहुंचा, जहां रह रही छात्रा ने उसे देख लिया। अज्ञात व्यक्ति के इस तरह से छात्रावास में घुसने की घटना से साबित हो गया है कि विवि प्रशासन छात्रावासों में रह रही छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है।
विवि के सुरक्षा अधिकारी सुरेश चौहान का कहना है कि सर्दियों की छुट्टियों में छात्रावासों में कम छात्राओं के होने से सुरक्षा कर्मी छात्रावास में नहीं थे, मगर साथ में सुरक्षा कर्मियों को बने ड्यूटी रूम में वे मौजूद थे, वे मुख्य सड़क में गश्त लगाते हैं। लड़कियों से सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि कन्या छात्रावासों की लगाई गई फेन्सिंग की मरम्मत किए जाने का मामला निर्माण विंग के अधिकारियों के ध्यान में लिखित में पहले ही लाया गया है।