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महिला शिक्षक को प्रताड़ित करने पर उपनिदेशक और प्रधानाचार्य पर दर्ज होगा केस

Thu, 12 Sep 2019 11:42 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
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अध्यापिका को अपमानित करने, झूठा रिकॉर्ड तैयार करने और षड्यंत्र रचने के एक मामले में अदालत ने उप-निदेशक उच्च शिक्षा, प्रधानाचार्य और डीपीई के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद इस मामले में जांच करने को कहा है।

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न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर (2) प्रतिभा नेगी के न्यायालय ने पीजीटी (अंग्रेजी) अध्यापिका की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए उप-निदेशक उच्च शिक्षा मंडी, संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य और एक डीपीई के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में पुलिस तहकीकात जरूरी है। जिससे सही नतीजे पर पहुंचा जा सके। 

शारीरिक बनावट को लेकर अपमानजनक टिप्पणियों के आरोप

अधिवक्ता रूपिंद्र सिंह के माध्यम से अदालत में दायर याचिका के अनुसार शिकायतकर्ता मई 2017 में  संबंधित स्कूल में नियुक्त हुई थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक पाठशाला में आने के बाद से ही पाठशाला के प्रधानाचार्य और डीपीई ने उसकी शारीरिक बनावट को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कर  प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

इसी सिलसिले में 24 अक्तूबर 2017 को प्रधानाचार्य ने शिकायतकर्ता को सुबह की प्रार्थना के समय अपमानित कर चिल्लाते हुए उसे वहां से जाने और पीछे खडे़ होने को कहा। शिकायतकर्ता ने प्रधानाचार्य के माध्यम से उपनिदेशक को अर्जी देकर इस मामले का निराकरण करने को कहा था, लेकिन प्रधानाचार्य ने अर्जी लेने से इंकार कर दिया।

इस पर शिकायतकर्ता ने डाक के माध्यम से उपनिदेशक और प्रधानाचार्य को अपनी शिकायत भेजी। आरोप हैं कि इसके बाद प्रधानाचार्य और डीपीई ने षड्यंत्र रचते हुए शिकायतकर्ता के खिलाफ झूठा रिकार्ड और जांच रिपोर्ट तैयार की। 
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पुलिस ने भी नहीं की कोई कार्रवाई

सूचना के अधिकार से ली गई जानकारी से पता चला कि उपनिदेशक ने अपनी जांच रिपोर्ट में सही तथ्यों को छिपाया है। इतना ही नहीं थाना प्रभारी और जिला पुलिस अधीक्षक ने भी इस मामले में कोई कार्यवाई नहीं की। ऐसे में अध्यापिका ने अदालत में याचिका दायर की थी।

अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर माना कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अदालत ने अध्यापिका को अपमानित करने, झूठा रिकार्ड तैयार करने और षड्यंत्र रचने की प्राथमिकी दर्ज करने और किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए सही तरीके से तहकीकात करने के निर्देश दिए हैं।
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