खेमराज ने पुलिस जांच में कबूला है कि वह 2017 से फर्जी डिग्रियां बनाने का काम करता है। नवंबर 2017 में संजीव कुमार ने हजारों रुपये देकर खेमराज से फर्जी डिग्री बनाने के लिए संपर्क किया। इसके बाद खेमराज ने कंप्यूटर, स्कैनर और प्रिंटिंग का सामान खरीदा।
डिग्रियों के लिए खाली शीट शिमला की स्टेशनरी की दुकान से खरीदी। इस मामले में पुलिस अब एचपीयू प्रशासन से संपर्क कर रही है। एचपीयू की फर्जी डिग्री मामले में पुलिस अभी तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।