एक्सीलेंस कॉलेज संजौली में हुए 80 लाख रुपये के घोटाले के मामले में शिक्षा विभाग सीनियर असिस्टेंट की पुरानी फाइलों की जांच में जुट गया है। इस मामले में घिरे सीनियर असिस्टेंट की ओर से पूर्व में निपटाई गई सभी फाइलों को भी जांचा जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने सस्पेंड किए गए सीनियर असिस्टेंट की सस्पेंशन को बहाल कर उसे निदेशालय में तैनात कर दिया है।
संजौली कॉलेज में हुए लाखों रुपये की हेराफेरी के मामले की विजिलेंस जांच भी चल रही है। शिक्षा विभाग का मानना है कि आरोपी सीनियर असिस्टेंट को बेवजह हर महीने आधा वेतन देना पड़ रहा है। ऐसे में विभाग ने नया तरीका तलाशते हुए सस्पेंशन को बहाल कर सीनियर असिस्टेंट को रोजाना निदेशालय में हाजिर रहने के आदेश जारी कर दिए हैं।
इस मामले में शिक्षा विभाग ने संजौली कॉलेज के तीन पूर्व प्रिंसिपलों सहित दो प्रवक्ताओं की चार्जशीट तैयार कर सरकार को सौंप दी है। आने वाले दिनों में सरकार इस मामले में बड़ा फैसला ले सकती है। सीनियर असिस्टेंट सहित पूर्व प्रिंसिपलों और प्रवक्ताओं से रिकवरी करने की तैयारी भी है।
यह है मामला
राजधानी शिमला स्थित एक्सीलेंस कॉलेज संजौली में 80 लाख रुपये का गबन हुआ है। कॉलेज के विभिन्न बिलों की अदायगी, सामान की खरीद और ग्रांट में यह गोलमाल किया गया है। कॉलेज के सीनियर असिस्टेंट पर गबन करने का सीधा आरोप है। सरकारी धनराशि के इस घोटाले में कॉलेज के कई अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता का अंदेशा भी है।
आरोप है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कॉलेज संजौली में बीते ढाई साल से कैश बुक नहीं भरी गई। कॉलेज प्रशासन की ओर से की गई विभिन्न सामान की खरीद, हॉस्टल फीस, विभिन्न बिलों की अदायगी और सरकार से मिली ग्रांट का कहीं भी कोई ब्योरा नहीं रखा गया है।