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इराक में अपहृत 40 भारतीयों में हिमाचल के 3 युवक

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सुन्नी आतंकियों के संघर्ष से जूझ रहे इराक में जिन 40 भारतीय नागरिकों का अपहरण किया गया है, उसमें तीन हिमाचल प्रदेश कांगड़ा जिले के रहने वाले हैं। अब तक अगवा हुए 40 लोगों में कांगड़ा पासू के अमन, लंज के इन्द्रजीत का नाम सामने आया है।
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तीसरा युवक ज्वाली का बताया जा रहा है। अमन ने रविवार को अपने घर आखिरी बार फोन करके बताया कि उन्हें बंदूक की नोक पर अगवा कर लिया गया है। सब को कहां ले जाया जा रहा है यह उन्हें पता नहीं।

उसने यह भी बताया कि उनके साथ और भारतीय भी हैं। अमन ने फोन पर यह भी बताया कि इस अपहरण की सूचना उन्होंने भारतीय दूतावास के अफसरों को दे दी है। इसीलिए उनका अगवा होने वालों में उनका नाम भी दर्ज हो गया।
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बगदाद की कंपनी में करते थे काम

अपने बच्चों को मुसीबत में फंसा देख इन परिवारों ने बुधवार को भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल से मिलकर उन्हें छुड़ाने की गुहार की। अगवा किए गए 40 भारतीय नागरिकों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।

अमन के घरवालों के मुताबिक ये तीनों युवक बगदाद की कंपनी टीएनएच में काम करते हैं। अमन व इन्द्रजीत फॉग लाइट आपरेटर हैं। तीनों इराक के हिंसा प्रभावित इलाके मोसुल शहर में काम करते हैं। तेल संपदा से भरपूर इस इलाके पर सुन्नी जिहादियों ने कब्जा कर लिया है।

कांगड़ा के पासू के रहने वाले अमन (28) पिछले नौ महीने से मोसूल में काम कर रहा है। उसके भाई रमन ने यहां बताया कि अमन के साथ उसकी आखिरी बार बात रविवार को हुई थी। उसने अगवा होने की बात की। लेकिन इसके बाद से अमन से संपर्क टूट गया। परिवार को नहीं पता है कि अमन कहां है।

‌‌बच्चों को बचाने की लगाई गुहार

इराक में बिगड़ते हालात से अमन की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंता में पड़ गया है। हम सभी अमन की सुरक्षा को लेकर ईश्वर से कामना कर रहे हैं। लंज का इंद्रजीत (26) भी मोसूल में रोजगार के लिए गया हुआ है।

रमन ने बताया कि अमन ने हिमाचल के ज्वाली में रहने वाले अपने एक दोस्त के बारे में भी बताया था। हो सकता है वह भी इन 40 लोगों में शामिल हो। तीसरे युवक का नाम नहीं पता चल पाया है।

रमन ने बताया कि इसे पहले अमन का वीरवार को फोन आया था। उसने बताया था कि यहां के हालात ठीक नहीं है। दोनों पीड़ितों के घर वालों ने बुधवार को यहां भाजपा के सांसद श्‍ाांता कुमार से मुलाकात कर अपने बच्चों की जान बचाने की गुहार की।
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कंस्ट्रक्‍श्‍ान कंपनी में करते हैं काम

मोसुल शहर में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्यरत ज्यादातर लोग पंजाब के रहने वाले हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगवा भारतीय नागरिकों का पता लगाने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है। अगवा लोगों की रिहाई के लिए अभी तक कहीं से फिरौती की कोई मांग भी नहीं की गई है। मोसुल शहर पर सुन्नी आतंकी संगठन आईएसआईएल का कब्जा है।

अंतरराष्ट्रीय सामाजिक संस्था इंटरनेशनल रेड क्रेसेंट को भी अपहृत भारतीयों के बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही कोई संपर्क हो पा रहा है। अगवा नागरिकों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए मोदी सरकार ने इराक में भारतीय राजदूत रह चुके सुरेश रेड्डी को भी बगदाद भेजा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि  अगवा किए गए लोग मोसुल में तारिक नूर अलहूदा कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इराक में हालात कठिन हैं। मगर सरकार बगदाद में दूतावास बंद नहीं कर रही है बल्कि उसको ज्यादा तत्पर बना रही है। भारतीयों को किसने अपहृत किया है इसकी जानकारी नहीं हो सकी है।
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