हिमाचल सरकार को 2700 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाली इटको कंपनी के खिलाफ सीआईडी में दर्ज दो मुकदमों की जांच में नए खुलासे हुए हैं। 2200 करोड़ के टैक्स चोरी मामले में आबकारी एवं कराधान महकमे के तत्कालीन आला अफसरों की मिलीभगत का अंदेशा जांच में सामने आया है।
ऐसे में आने वाले दिनों में आबकारी महकमे के बड़े अफसरों को सीआईडी गिरफ्त में ले सकती है। सीआईडी ने पांच करोड़ के गड़बड़झाले में बिजली बोर्ड को क्लीन चिट देने की तैयारी कर ली है जबकि कंपनी को इसमें संलिप्त पाया है। बता दें कि फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कंपनी हिमाचल से फरार है।
सीआईडी में आबकारी एवं कराधान महकमे को 2200 करोड़ की चपत लगाने के मामले में पहली एफआईआर दर्ज हुई है जबकि दूसरी एफआईआर बिजली बोर्ड के साथ बिजली बिल में 5 करोड़ की जालसाजी करने को लेकर दर्ज है। जांच में सामने आया है कि नाहन पांवटा के जगतपुर में कंपनी ने अरबों का निवेश कर काम शुरू किया।
बैंकों से कर्ज लेने के लिए ज्यादा दिखाया उत्पादन
कंपनी ने बैंकों से कर्ज लेने के लिए उत्पादन ज्यादा दिखाया जबकि असल में उत्पादन उतना था ही नहीं। उत्पादन ज्यादा दिखाने पर टैक्स बढ़ गया लेकिन कंपनी ने इसे नहीं चुकाया। जांच में यह भी सामने आया है कि आबकारी महकमे के कुछ अधिकारियों को इसकी जानकारी थी लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी।
इससे पहले कि कंपनी पर कोई कार्रवाई हो पाती, वह हिमाचल से फरार हो गई। उधर, बिजली बोर्ड का आरोप है कि कंपनी ने बिजली बिल के पांच करोड़ नहीं दिए। बिजली बोर्ड के सब डिविजन नाहन के साथ बिल चुकाने के नाम पर 5 करोड़ की जालसाजी की गई।
कंपनी ने बिजली बिल का पैसा जारी करने के लिए बैंक से फर्जी आरटीजीएस जारी कर दिया। सीआईडी के डीआईजी डॉ. विनोद कुमार धवन का कहना है कि कंपनी के खिलाफ सीआईडी थाने में दो एफआईआर दर्ज हैं। सीआईडी इस मामले में हर पहलू पर छानबीन कर रही है।