राजधानी के ओल्ड बसस्टैंड पर टैक्सी चालकों से मारपीट और क्विक रिएक्शन टीम बुलाकर राहगीरों को पिटवाने के मामले में शिमला के पूर्व डीएसपी ट्रैफिक अमित ठाकुर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामले में दर्ज एफआईआर की जांच कर रही शिमला पुलिस ने सरकार से उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति देने की मांग की है।
शिमला पुलिस की इस मांग पर फिलहाल सरकार विचार कर रही है। गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक अगर सरकार मंजूरी देती है तो शिमला पुलिस इस मामले में अमित ठाकुर के खिलाफ चार्जशीट पेश कर देगी।
4 मई 2016 की रात शिमला की स्मार्ट पुलिस के डीएसपी ट्रैफिक अमित ठाकुर और एक टैक्सी चालक की पुराने बस स्टैंड के नजदीक किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। जानकारी के अनुसार कहासुनी के बाद साथी चालक को पीटता देख टैक्सी चालकों ने डीएसपी को दौड़ा दिया।
बताया जाता है कि चालकों ने डीएसपी के साथ हाथापाई की जिसके बाद डीएसपी ने क्विक रिएक्शन टीम को बुला लिया। क्यूआरटी के जवानों ने मौके पर पहुंचकर टैक्सी चालकों पर लाठियां भांजी। साथ ही तमाशा देख रहे आम लोगों को भी दौड़ा दौड़ाकर पीट डाला।
अगले दिन टैक्सी चालक और आम लोग मामले को लेकर उपायुक्त शिमला से मिले तथा उचित कार्रवाई की मांग की। इसके बाद तत्कालीन उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने मैजिस्ट्रेट जांच बिठा दी थी। इस बीच शिमला पुलिस ने भी डीएसपी और क्यूआरटी की पूरी टीम का तबादला कर मामला दर्ज कर लिया था।
सूत्रों के अनुसार दो साल की जांच के बाद अब कोर्ट में चालान पेश करने के लिए आरोपी डीएसपी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी गई है। नाम न लिखने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर अभियोजन स्वीकृति मिल गई तो सजा होने पर ठाकुर बर्खास्त भी हो सकते हैं।